दिल्ली में तिरंगा मार्च के दौरान 150 लोग हिरासत में, ममता बनर्जी ने बताया अघोषित आपातकाल
नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ‘लहरा दो तिरंगा’ मुहिम के दौरान शुक्रवार को पुलिस ने करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हैं। यह मार्च दिल्ली के कनॉट प्लेस में आयोजित किया जाना था, जहां पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी।
सीजेपी के अभिजीत दीपके ने युवाओं से बड़ी संख्या में घरों से निकलकर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराने की अपील की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मार्च के लिए अनुमति नहीं मिलने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका का हवाला देते हुए आयोजकों को कार्यक्रम नहीं करने का नोटिस दिया। कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा लागू की गई थी। इसके बावजूद कई प्रदर्शनकारी तिरंगा लेकर एकत्र हुए, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभिजीत दीपके की हिरासत पर सवाल उठाते हुए इसे देश में ‘अघोषित आपातकाल’ जैसी स्थिति बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को हिरासत में लेना गंभीर चिंता का विषय है। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
यह विरोध प्रदर्शन सीजेपी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के विरोध में भी आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई। उधर, मुंबई में आजाद मैदान पर कार्यक्रम के लिए पुलिस ने कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी थी। दिल्ली में हुई कार्रवाई के बाद तिरंगा मार्च और प्रदर्शनकारियों की हिरासत का मुद्दा चर्चा में है।
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