सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी पर आम नागरिक भी कर सकेंगे शिकायत
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने या जरूरी तथ्यों को छिपाने के मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार के खिलाफ आम नागरिक भी आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने का अधिकार केवल चुनाव आयोग तक सीमित नहीं है। अदालत के इस फैसले से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की जवाबदेही को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125ए के तहत दर्ज निजी शिकायतों पर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 195 की रोक लागू नहीं होगी। धारा 125ए चुनावी नामांकन के दौरान गलत जानकारी देने, महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने या अनिवार्य जानकारियों का खुलासा नहीं करने से संबंधित है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी उम्मीदवार को परेशान करने के लिए झूठी या निराधार शिकायतें दर्ज कराने पर सक्षम मजिस्ट्रेट मामले के तथ्यों के अनुसार उचित आदेश दे सकते हैं।
यह मामला कर्नाटक के बीदर विधानसभा क्षेत्र से विधायक शैलेंद्र बेल्दाले के खिलाफ राजकुमार मदकी की शिकायत से जुड़ा है। मदकी ने आरोप लगाया था कि विधायक ने 2023 के विधानसभा चुनाव में नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में अपने आवासीय पते के संबंध में गलत जानकारी दी थी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 7 मार्च 2025 को उनकी शिकायत रद्द कर दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने निजी नागरिकों की शिकायतों को कानूनी रूप से स्वीकार्य मानते हुए इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट कर दी, लेकिन विधायक शैलेंद्र बेल्दाले के खिलाफ पहले रद्द की गई कार्यवाही को बहाल नहीं किया। इस फैसले का अर्थ है कि नागरिक चुनावी हलफनामों में कथित गड़बड़ियों को लेकर कानूनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, हालांकि शिकायत दर्ज होने मात्र से किसी उम्मीदवार का दोष साबित नहीं होता।
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