जब परदे पर गरजे नाना: ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने’, अभिनेता के 10 आइकॉनिक डायलॉग जो आज भी हैं याद
नाना पाटेकर भारतीय सिनेमा के उन अभिनेताओं में शामिल रहे, जिनकी पहचान सिर्फ उनके अभिनय से नहीं, बल्कि आवाज, संवाद अदायगी और किरदारों की गहराई से भी बनी। उन्होंने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और करीब पांच दशक के सफर में हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं।
नाना के संवाद बोलने का अंदाज इतना प्रभावशाली था कि कई फिल्मी पंक्तियां पर्दे से निकलकर आम बोलचाल और लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन गईं। ‘क्रांतिवीर’, ‘यशवंत’, ‘तिरंगा’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके संवादों ने दर्शकों पर खास छाप छोड़ी।

उनके चर्चित संवादों में ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने?’ और ‘सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान’ जैसे संवाद शामिल हैं। ‘एक मच्छर...’ वाला संवाद ‘यशवंत’ में उनकी तीखी संवाद अदायगी का उदाहरण बना, जबकि ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ में उनके अलग-अलग अंदाज के संवाद भी खूब लोकप्रिय हुए।

नाना पाटेकर की खासियत यह थी कि वह गंभीर, सामाजिक और आक्रोश से भरे किरदारों के साथ-साथ हास्य भूमिकाओं में भी अपनी अलग पहचान कायम करते थे। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का किरदार और उसका ‘कंट्रोल उदय, कंट्रोल’ वाला अंदाज आज भी दर्शकों के बीच याद किया जाता है।

उनकी संवाद अदायगी में बनावटीपन कम और भावनाओं की तीव्रता ज्यादा दिखाई देती थी। यही वजह रही कि उनके कई संवाद फिल्मों के दृश्यों से आगे निकलकर दर्शकों की यादों का हिस्सा बन गए। नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके प्रशंसक एक बार फिर उनके इन्हीं यादगार किरदारों और संवादों को याद कर रहे हैं।
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