गुना की रामलीला में श्रीराम के वनगमन और निषादराज मिलन का भावपूर्ण मंचन, त्याग, मर्यादा और सामाजिक समरसता का दिया संदेश
भगवान श्रीराम के वनगमन और निषादराज से आत्मीय मिलन के प्रसंगों का शास्त्री पार्क में सजीव मंचन किया गया। माता कौशल्या का वात्सल्य और माता सुमित्रा की कर्तव्यबोध से जुड़ी सीख ने दर्शकों को भावविभोर किया। मंचन के माध्यम से त्याग, मर्यादा और पारिवारिक संस्कारों का संदेश दिया गया।
सार्वजनिक नव कला मंडल श्री रामलीला एवं दशहरा महोत्सव समिति, गुना के तत्वावधान में आयोजित रामलीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश भाजपा प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट श्री विकास जैन नखराली ने समिति सदस्यों के साथ श्रीराम दरबार के पूजन-अर्चन एवं रामायण जी की आरती कर आरंभ किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का आदर्श है। उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में संस्कार, सेवा और समरसता को मजबूत किया जा सकता है।
मंचन में वन गमन से पूर्व श्रीराम द्वारा माता कौशल्या से आशीर्वाद लेने तथा लक्ष्मण को माता सुमित्रा द्वारा श्रीराम की सेवा को अपना धर्म मानने की सीख देने के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। निषादराज के साथ श्रीराम की आत्मीय भेंट ने संदेश दिया कि सच्ची मित्रता और मानवीय संबंध जाति, पद एवं प्रतिष्ठा से ऊपर होते हैं। कलाकारों के अभिनय ने प्रसंगों को प्रभावशाली बनाया।
इस अवसर पर समिति संयोजक बृजेन्द्र सिंह पवैया (बंटी भैया), अध्यक्ष महावीर सिंह चौहान, महामंत्री अमित शर्मा (भार्गव), कोषाध्यक्ष ओम लोधा, उपाध्यक्ष नारायण लाल मेयर एवं सचिव निरंजन भाया सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
श्रीराम की भूमिका दीपक शर्मा, लक्ष्मण की नरेन्द्र कुशवाह, माता सीता की श्री दिनेश, कैकेयी की गजराज चंदेल, दशरथ की राम बाबू शर्मा और निषादराज की भूमिका जगदीश ने निभाई। सामंत की भूमिका मुलायम सिंह ने निभाई, जबकि व्यास भगवत ने कथा-वाचन किया। मंच व्यवस्था रंजीत सिंह गुर्जर ने संभाली। समिति ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)