सुप्रीम कोर्ट: ‘आप भगवान को क्यों परेशान कर रहे हो?’ महावीर जी मंदिर प्रबंधन विवाद पर फैसला सुरक्षित
नई दिल्ली। राजस्थान के प्रसिद्ध महावीर जी जैन मंदिर के प्रबंधन को लेकर श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों के बीच चल रहे लंबे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की मुकदमेबाजी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और पूछा कि क्या इस तरह की कानूनी लड़ाई से भगवान प्रसन्न होंगे।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिगंबर समिति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर्यमा सुंदरम और प्रतिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। पीठ ने दोनों पक्षों को आठ दिनों के भीतर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि उनका पक्ष मंदिर के धार्मिक स्वरूप में बदलाव की मांग नहीं कर रहा है, इसलिए पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 लागू नहीं होता। वहीं, आर्यमा सुंदरम ने तर्क दिया कि वर्ष 1991 के कानून के तहत कार्यवाही पहले ही समाप्त की जा चुकी थी, इसलिए राजस्थान हाईकोर्ट को इस मामले में अपील सुनने का अधिकार नहीं था।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला ने दोनों पक्षों को मामले की संवेदनशीलता का ध्यान रखने की बात कही। उन्होंने सवाल किया कि क्या दोनों संप्रदाय अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार अलग-अलग समय पर पूजा और अनुष्ठान करना चाहते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि भगवान को परेशान नहीं किया जाना चाहिए और पूछा कि इस तरह की मुकदमेबाजी से क्या भगवान प्रसन्न होंगे।
क्या है पूरा विवाद?
मामला राजस्थान सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1959 की धारा 40 के तहत दायर एक आवेदन से जुड़ा है। इसमें दिगंबर समिति के पदाधिकारियों को हटाकर श्वेतांबर प्रबंधन समिति गठित करने की मांग की गई थी। वर्ष 1994 में ट्रायल कोर्ट ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के आधार पर कार्यवाही समाप्त कर दी थी।
इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार कर ली। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ दिगंबर समिति ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। अब शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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