सत्य निकेतन इमारत हादसा: मालिक हरिराम, पत्नी और बेटे समेत गिरफ्तार; एलजी सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन की संकरी गली में लड़कों के छात्रावास के रूप में इस्तेमाल की जा रही करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत रविवार को अचानक ढह गई। हादसे में सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए राहत और बचाव अभियान जारी है। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत गिरने के बाद धूल का गुबार उठता दिखाई दे रहा है।
दिल्ली पुलिस ने मामले में इमारत के मालिक हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार किया है। पुलिस हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत में सुरक्षा मानकों और निर्माण नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
हादसे के बाद एलजी सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, एनडीआरएफ प्रमुख पीयूष आनंद, दिल्ली पुलिस आयुक्त, शिक्षा सचिव, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति और एमसीडी आयुक्त समेत वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए। बैठक में हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य तथा शहर में इमारतों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मामले पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने एमसीडी से पूछा है कि दिल्ली में पेइंग गेस्ट आवासों के लिए कोई नियामक ढांचा मौजूद है या नहीं। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय को बाहर से आने वाले छात्रों और उनके लिए उपलब्ध छात्रावास सुविधाओं का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है।
हाईकोर्ट ने संबंधित इमारत की वैध अनुमतियों और अधिकारियों की संभावित चूक से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। अदालत ने कहा कि छात्रावासों और पीजी आवासों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा केवल मकान मालिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संबंधित सरकारी अधिकारियों की भी जवाबदेही है।
अदालत ने एमसीडी को दिल्ली के पीजी और छात्रावासों का एक सप्ताह के भीतर सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि संबंधित अधिकारियों ने अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का उचित तरीके से निर्वहन किया होता, तो इस तरह की घटनाओं को रोकने की संभावना थी।
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में पीजी और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था, भवनों के निरीक्षण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच और अदालत की कार्यवाही के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसे के पीछे क्या कारण थे और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
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