मीडिया की विश्वसनीयता में आई गिरावट लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती: नितिन गडकरी
नागपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मीडिया की घटती विश्वसनीयता को लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बताया है। शनिवार को आईआईएम नागपुर में आयोजित मीडिया कॉन्क्लेव 2026 में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका के साथ स्वतंत्र मीडिया का होना भी बेहद जरूरी है। कॉन्क्लेव का विषय ‘मीडिया, नेतृत्व और नई विश्व व्यवस्था’ था।
गडकरी ने कहा कि लोकतंत्र के चार प्रमुख स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया हैं और इन सभी की भूमिका लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में लगभग सभी क्षेत्रों में विश्वसनीयता का संकट देखने को मिल रहा है, लेकिन मीडिया के क्षेत्र में यह संकट अधिक गंभीर है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मीडिया संस्थानों ने अपनी विश्वसनीयता नहीं खोई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विश्वसनीयता, अच्छी छवि और ईमानदारी 21वीं सदी की सबसे बड़ी पूंजी हैं। ऐसे में मीडिया संस्थानों और पत्रकारों को अपनी भूमिका और जिम्मेदारी पर गंभीरता से विचार करना चाहिए तथा जनता के बीच खोया भरोसा दोबारा कायम करने के लिए गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सोशल मीडिया ने बदली मीडिया की भूमिका
गडकरी ने कहा कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने सूचना के प्रसार और राजनीतिक विमर्श का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। एक समय में बड़े समाचार पत्र और मीडिया संस्थान यह दावा करते थे कि वे चुनावी परिणामों और जनमत को प्रभावित करने की स्थिति में हैं, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में परिस्थितियां काफी बदल गई हैं। अब मीडिया अकेला ऐसा माध्यम नहीं है जो जनता की राय को प्रभावित करता हो।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि बदलते दौर में उन्हें अपनी जिम्मेदारी को और गंभीरता से समझने की जरूरत है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य आम लोगों, समाज और देश के हित से जुड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छी पत्रकारिता और अच्छे काम को अंततः समाज में पहचान मिलती है, इसलिए पत्रकारों को गुणवत्ता और विश्वसनीयता से समझौता नहीं करना चाहिए।
लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जागरूकता जरूरी
गडकरी ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक मुद्दों को लेकर जनता को जागरूक करना जरूरी है। उनके मुताबिक राजनीति और राजनीतिक दल लोकतंत्र की महत्वपूर्ण ताकत हैं। विचारधाराओं को लेकर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
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