बंगाल में ‘अनमैप्ड’ वोटरों पर नई गाइडलाइन लागू, बुजुर्ग और असहाय मतदाताओं को राहत; अभिषेक बनर्जी ने किया स्वागत
कोलकाता (आरएनआई)। पश्चिम बंगाल में ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने नई गाइडलाइन जारी की है, जो तकनीकी कारणों से वोटर डेटा में हुई असंगतियों को सुलझाने के साथ बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग मतदाताओं के लिए व्यक्तिगत सुनवाई से छूट प्रदान करेगी। तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस कदम का स्वागत किया है।
राज्य में ‘अनमैप्ड’ वोटरों की समस्या वर्ष 2002 की मतदाता सूची के पीडीएफ डेटा को सीएसवी फॉर्मेट में बदलने के दौरान हुई तकनीकी त्रुटियों के कारण उभरी थी। इस प्रक्रिया में कुछ मतदाताओं की जानकारी BLO (Booth Level Officer) ऐप में लिंक नहीं हो पाई, हालांकि उनकी जानकारी 2002 की प्रमाणित हार्ड कॉपी में मौजूद है। डेटा अनमैपिंग के कारण इन मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने के आदेश भी जारी हो रहे थे, जिससे कई बुजुर्ग और कमजोर मतदाता परेशान हो रहे थे।
नई गाइडलाइन के तहत 85 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाता, गंभीर रूप से बीमार या दिव्यांग व्यक्ति यदि अपने वोटर विवरण को लेकर समस्या का सामना कर रहे हैं और वे इस बात का अनुरोध करेंगे, तो उन्हें अब व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। ऐसे मामलों में चुनाव अधिकारी फोन पर संपर्क कर सकते हैं और घर पर जाकर सत्यापन करवा सकते हैं। उन मतदाताओं को भी राहत मिलेगी जिन्हें पहले ही सुनवाई का नोटिस जारी किया जा चुका है — उन्हें बैठकर सुनवाई में भाग लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह गाइडलाइन तत्काल प्रभाव से लागू होगी और सभी जिला चुनाव अधिकारियों को इसके सख्त पालन के निर्देश दिए गए हैं। जिन जिलों ने अब तक ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं की प्रमाणित सूची CEO कार्यालय को नहीं भेजी है, उन्हें जल्द ऐसा करने कहा गया है, ताकि सूची अपलोड होने के बाद ही व्यक्तिगत सुनवाई से छूट का लाभ मिल सके। BLO आवश्यक होने पर घर जाकर फोटो सहित फील्ड वेरिफिकेशन भी कर सकेंगे और जरूरी दस्तावेज अपलोड करेंगे।
तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे को रचनात्मक ढंग से उठाया था और CEO से मुलाकात के बाद त्वरित कदम उठाया गया। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के बीमार वरिष्ठ नागरिकों को भी मानवीय आधार पर राहत दी जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
CEO कार्यालय ने यह भी कहा है कि चुनाव आयोग से आग्रह किया गया है कि BLO, ERO और AERO को 2002 की मतदाता सूची के प्रासंगिक हिस्सों को सिस्टम में अपलोड करने की अनुमति दी जाए, जिससे तकनीकी स्तर पर सुधार हो सके। जब तक सिस्टम में यह सुधार नहीं होता, तब तक ऐसे मतदाताओं को सुनवाई के लिए न बुलाने के निर्देश जारी रहेंगे।
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