नई दिल्ली (आरएनआई)। West Bengal में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच Bharatiya Janata Party (भाजपा) के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में Election Commission of India के पूरे पैनल से मुलाकात कर चुनाव अधिकतम तीन चरणों में कराने की मांग की है। साथ ही पार्टी ने राज्य में हिंसा-मुक्त और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सख्त सुरक्षा इंतजाम करने की भी अपील की है।
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को 16 बिंदुओं की मांगों की सूची भी सौंपी। इसमें राज्य की सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar और चुनाव आयुक्त S. S. Sandhu तथा Vivek Joshi सोमवार को विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी राय सुन रहे हैं।
भाजपा नेता Jagannath Chattopadhyay ने बताया कि पार्टी ने आयोग से आग्रह किया है कि चुनाव एक, दो या अधिकतम तीन चरणों में कराए जाएं। उनका कहना है कि इससे ज्यादा चरणों में चुनाव कराने की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा भाजपा ने राज्य में तैनात करीब 400 कंपनियों के केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय बलों का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जा रहा और उन्हें राज्य पुलिस के निर्देशों पर काम करना पड़ रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर राज्य में भयमुक्त माहौल बनाना है तो चुनाव आयोग को उन पुलिस और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जो मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से मतदान करने से रोकते हैं।
इस दौरान भाजपा नेता Shishir Bajoria ने भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बलों की रूट मार्च संवेदनशील इलाकों के बजाय शांत क्षेत्रों में कराई जा रही है। उनके अनुसार कई जगह रूट मार्च ऐसी सड़कों पर हो रहा है जहां आबादी नहीं है और केवल वाहन गुजरते हैं, जो चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।
भाजपा ने चुनाव आयोग से यह भी अनुरोध किया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया की अवधि कम रखी जाए और सात या आठ चरणों में मतदान कराने से बचा जाए। इसके अलावा पार्टी ने संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान के नियमों में बदलाव की भी मांग की है। भाजपा का सुझाव है कि जिन बूथों पर 85 प्रतिशत से अधिक मतदान होता है या जहां पहले चुनावों के दौरान हिंसा हुई है, उन्हें स्वतः संवेदनशील माना जाए और वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएं।
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