मिस्र का रेगिस्तान कभी था समृद्ध महासागर का हिस्सा, यहां तैरती थीं विशाल शार्क
आज जिस मिस्र के पश्चिमी रेगिस्तान को सूखे और बंजर इलाके के रूप में जाना जाता है, वह करोड़ों वर्ष पहले एक विशाल और समृद्ध महासागर का हिस्सा था। वैज्ञानिकों ने मिस्र के पश्चिमी रेगिस्तान स्थित अबू-तरतूर पठार से प्राचीन शार्क के दुर्लभ जीवाश्म और दांत खोजे हैं, जो इस बात के प्रमाण हैं कि यह क्षेत्र कभी समुद्री जीवों और शार्क की कई प्रजातियों का प्रमुख ठिकाना हुआ करता था।
इस खोज से जुड़ा शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका ‘क्रिटेशियस रिसर्च’ में प्रकाशित हुआ है। काहिरा विश्वविद्यालय के जीवाश्म विज्ञानी तारेक यासीन और उनकी टीम ने पश्चिमी रेगिस्तान की चट्टानों से सात अलग-अलग प्रजातियों की प्राचीन शार्क के जीवाश्म और दांतों की पहचान की है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन शार्क के दांतों की बनावट अलग-अलग प्रकार की थी। कुछ दांत सुई की तरह नुकीले थे, जबकि कुछ चौड़े और आरी के आकार के थे। दांतों की यह विविधता बताती है कि अलग-अलग शार्क प्रजातियां अपने शिकार और वातावरण के अनुसार क्रमिक रूप से विकसित हुई थीं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि उस समय इस समुद्री क्षेत्र में गहरी धाराएं पोषक तत्वों को पानी की सतह तक पहुंचाती थीं। इससे प्लवक और छोटी मछलियों की संख्या बढ़ी और एक समृद्ध समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ। यही कारण था कि यह इलाका शार्क जैसे बड़े समुद्री शिकारियों के लिए एक आदर्श आवास बन गया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज मिस्र के पश्चिमी रेगिस्तान के भूगर्भीय इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है और यह भी दिखाती है कि आज का सूखा रेगिस्तानी इलाका करोड़ों वर्ष पहले जीवन से भरपूर एक विशाल समुद्री दुनिया का हिस्सा था।
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