फिल्मी गानों पर डांस के वीडियो वायरल होने से घिरी तात्याटोपे यूनिवर्सिटी, कुलगुरु ने 7 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

Friday, September 25, 2026 - 12:46
Updated: 2 days ago
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फिल्मी गानों पर डांस के वीडियो वायरल होने से घिरी तात्याटोपे यूनिवर्सिटी, कुलगुरु ने 7 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

कुलगुरु डॉ किशन यादव ने कहा है कि सात दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है, जो भी दोषी होगा उस पर कार्यवाही की जाएगी।

क्रांतिकारी तात्याटोपे यूनिवर्सिटी इन दिनों वहां आयोजित फ्रेशर पार्टी-2026 को लेकर चर्चा में है। यहां शिक्षा के मंदिर के लिहाज से फूहड़ माने जाने वाले फिल्मी गानों पर स्टूडेंट्स के एक के बाद एक कई डांस होने के वीडियो वायरल हुए।

वीडियो देखने के बाद लोगों ने शिक्षा के मंदिर में आयोजित पार्टी में फिल्मी गीतों के चयन और नृत्य की शैली पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान में होने वाले कार्यक्रमों में प्रस्तुतियों की गरिमा और कार्यक्रम की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। ऐसी पार्टी किसी होटल या क्लब में होती तो कोई दिक्कत नहीं थी।

मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के कुलगुरु किशन यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि, मुझे जानकारी प्राप्त हुई है, 21 तारीख को ये कार्यक्रम हुआ था चूंकि मैं तो था नहीं, लेकिन जैसे ही मुझे ये जानकारी आप लोगों के माध्यम से प्राप्त हुई है, हमने एक जांच कमेटी बनाई है उसमे, कहा है कि मुझे शीघ्र जानकारी दें कि कैसे हुआ, क्या-क्या हुआ पूरा, विस्तृत जानकारी मुझे दें। 

डॉ किशन यादव ने आगे कहा कि, मुझे ये उम्मीद है कि बहुत जल्दी हमें ये जानकारी मिल जाएगी। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने की मैने बात कही है। उसमें जो भी दोषी होगा उसे दंडित किया जाएगा। 

कुलगुरु के इस बयान के बाद अब विश्वविद्यालय की जांच पर नजर है। जांच में यह भी स्पष्ट होगा कि फ्रेशर पार्टी के लिए क्या दिशा-निर्देश तय थे, कार्यक्रम की अनुमति और निगरानी की व्यवस्था क्या थी तथा वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे नाच गाने की अनुमति किसने दी थी।

बड़ा सवाल ये है कि जब ये सब चल रहा था तब किसी ने रोका क्यों नहीं? सूत्र बता रहे हैं कि अनायास कुछ नहीं हुआ। आयोजन को लेकर सब कुछ पहले से तय था, जिस पर अलग-अलग विचारधारा के कुछ छात्र नेता एकमत थे। आरोप है कि इसी के चलते यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने लापरवाही बरती। 

सवाल ये भी है कि क्या जांच के बाद असलियत सामने आएगी? या फिर ये जांच, मुद्दा ठंडा कर खुद ठंडे बस्ते में चली जाएगी? जिन पर आरोप है यदि जांच भी वही करेंगे तो अंजाम क्या होगा, समझना मुश्किल नहीं है। खैर, जो भी हो इस किरकिरी के बाद यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट को भविष्य के लिए सबक लेना चाहिए।

फ्रेशर पार्टी विद्यार्थियों के स्वागत और सांस्कृतिक प्रतिभा प्रदर्शन का मंच होती है। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय के छात्र कार्यक्रमों में मनोरंजन और शैक्षणिक संस्थान की गरिमा के बीच संतुलन बनाए रखने को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है।

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