टिकट बरामद न होने पर भी देना होगा मुआवजा, ट्रेन से गिरकर हुई थी शख्स की मौत; सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में वर्ष 2017 में हुए एक ट्रेन हादसे से जुड़े मामले में मृतक के माता-पिता को आठ लाख रुपये का मुआवजा बहाल कर दिया है। अदालत ने कहा कि केवल मृत यात्री के पास से टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर मुआवजे के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।
मामले में मृतक के माता-पिता ने रेलवे दुर्घटना के बाद मुआवजे की मांग की थी। हालांकि, टिकट नहीं मिलने को आधार बनाते हुए दावे पर सवाल उठाए गए थे। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी यात्री की मृत्यु के बाद उसके पास से यात्रा टिकट बरामद न होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह वैध यात्री नहीं था।
पीठ ने कहा कि मामले में मृतक के पिता ने शपथ पर बयान दिया था। इसके अलावा हादसे के बाद अस्पताल में मृतक का लंबे समय तक इलाज भी हुआ था। अदालत ने इन परिस्थितियों सहित पूरे मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए माना कि मृतक के वास्तविक यात्री होने की पुष्टि होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर मृतक के माता-पिता को मिलने वाला आठ लाख रुपये का मुआवजा बहाल कर दिया। अदालत के इस फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि रेलवे दुर्घटना से जुड़े मुआवजे के दावे पर फैसला करते समय केवल टिकट की बरामदगी या गैर-बरामदगी को निर्णायक आधार नहीं बनाया जा सकता।
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