₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे बना ‘स्विमिंग पूल’, उन्नाव में तीन फीट पानी भरने से वाहन फंसे
उन्नाव। करीब ₹36,000 करोड़ की लागत से बने गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद जलभराव की समस्या सामने आई है। उन्नाव जिले के सोनिक टोल प्लाजा पर शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद एग्जिट प्वाइंट पर करीब तीन फीट तक पानी भर गया। टोल लेन पूरी तरह जलमग्न होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई छोटे वाहन पानी में फंस गए।
पहले भी सामने आ चुकी है जलभराव की समस्या
गंगा एक्सप्रेसवे का 29 अप्रैल को लोकार्पण किया गया था। इसके बाद भी सोनिक टोल प्लाजा के आसपास जलभराव की समस्या सामने आ चुकी है। 31 अगस्त को भी टोल प्लाजा के पास करीब दो फीट पानी भर गया था। उस दौरान छोटे वाहनों में पानी घुस गया था और कई मोटरसाइकिलें बीच रास्ते में बंद हो गई थीं। टोल कर्मचारियों को भी पानी से भरे बूथों में काम करना पड़ा था।
हाईटेंशन लाइन के कारण सड़क की ऊंचाई बढ़ाने में दिक्कत
टोल मैनेजर गौरव शर्मा के मुताबिक, टोल प्लाजा के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के कारण सड़क को जरूरत के मुताबिक ऊंचा नहीं किया जा सकता। बिजली लाइन और सड़क के बीच 14 मीटर की क्लीयरेंस जरूरी है, जिसके चलते टोल प्लाजा की ऊंचाई बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है। वहीं, निर्माण एजेंसी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर के मैनेजर आरएस मिश्रा ने बताया कि इतनी भीषण जलभराव की स्थिति की पहले आशंका नहीं थी। अब भविष्य में जलभराव रोकने के लिए टोल प्लाजा के किनारे दीवार बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
आधा किलोमीटर हिस्सा पानी में डूबा
बारिश के बाद टोल प्लाजा और सर्विस लेन का करीब आधा किलोमीटर हिस्सा पानी में डूब गया। छोटे वाहनों में पानी घुसने से चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मोटरसाइकिलें पानी में फंसकर बंद हो गईं, जिसके बाद चालकों को उन्हें खींचकर बाहर निकालना पड़ा। जलभराव को देखते हुए टोल प्रबंधन ने पंपसेट लगाकर पानी निकालने का प्रयास शुरू किया, लेकिन पानी की अधिक मात्रा के कारण समस्या पूरी तरह दूर नहीं हो सकी।
निर्माण एजेंसी पर उठ रहे सवाल
बार-बार जलभराव और सड़क के क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं के बाद गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। निर्माण में लगी एजेंसी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। बशीरगंज से सराय कटियां के बीच सड़क में भी पहले कई बार दरारें आने और नुकसान की बात सामने आई है।
बारिश के बाद सामने आई स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार और निर्माण एजेंसी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि हजारों करोड़ रुपये की लागत से तैयार एक्सप्रेसवे बारिश के दौरान जलमग्न हो रहा है। विपक्ष ने इसे निर्माण और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला बताया है।
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