सीमा खन्ना की भूमिका पर उठे सवाल, ECINET और मतदाता सूची के तकनीकी सिस्टम को लेकर बढ़ा विवाद
नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच अब आयोग की डायरेक्टर जनरल (आईटी) डॉ. सीमा खन्ना की भूमिका भी चर्चा में आ गई है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने चुनावी डेटा और मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी सिस्टम में उनकी भूमिका की जांच की मांग करते हुए कई सवाल उठाए हैं। हालांकि, डेटा में जानबूझकर हेरफेर किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, डॉ. सीमा खन्ना आयोग में डायरेक्टर जनरल (आईटी) के पद पर हैं। जनवरी 2026 में चुनाव आयोग ने ईसीआईनेट लॉन्च किया था। इसके तहत आयोग के 40 से अधिक ऐप और पोर्टल को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। लॉन्च के दौरान सीमा खन्ना ने ईसीआईनेट में साइबर सुरक्षा को प्रमुख आधार बताते हुए कहा था कि यह प्लेटफॉर्म चुनावों में पारदर्शिता, दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ जनता के भरोसे को मजबूत करने में मदद करेगा।
इसके बाद ईसीआईनेट और उसके अंतर्गत काम करने वाले ईआरओनेट सिस्टम को लेकर आयोग के भीतर भी सवाल उठने की बात सामने आई। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मौकों पर इस बात को लेकर चिंता जताई कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों यानी ईआरओ को मतदाता सूची में बदलाव करने के लिए जरूरी और पूर्ण तकनीकी पहुंच नहीं मिल रही थी। रिपोर्ट में आईटी विभाग की भूमिका और सिस्टम में केंद्रीकृत नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने सवाल उठाया था कि क्या डायरेक्टर जनरल (आईटी) को कानून के तहत ईआरओ की पूरी और स्वतंत्र तकनीकी पहुंच सीमित करने का अधिकार है। इससे पहले भी आयोग के अधिकारियों की ओर से आईटी सिस्टम को ईआरओ और अन्य वैधानिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों और अधिकारों के अनुरूप रखने को लेकर पत्राचार किया गया था।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने भी सीमा खन्ना की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि एसआईआर शुरू होने से पहले से ही उनकी पार्टी डेटा और मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर सवाल उठाती रही है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनके आधार पर सीमा खन्ना के खिलाफ किसी तरह की गड़बड़ी साबित नहीं हुई है।
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी ईसीआईनेट में कई पोर्टल और ऐप को एक साथ लाने तथा मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव के मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि केंद्रीकृत तकनीकी व्यवस्था से चुनावी डेटा पर नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि ईसीआईनेट को संविधान, जनप्रतिनिधित्व कानून, मतदाता पंजीकरण नियम और चुनाव संचालन नियमों के अनुरूप विकसित किया गया है। आयोग ने जनवरी में कहा था कि इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य चुनाव से जुड़ी सेवाओं को एकीकृत करना तथा पारदर्शिता और जनता के भरोसे को बढ़ाना है।
विवाद का एक अहम पहलू यह है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधारने की वैधानिक जिम्मेदारी जमीनी स्तर के निर्वाचन अधिकारियों की होती है। ऐसे में तकनीकी सिस्टम के माध्यम से इन अधिकारियों की पहुंच और निर्णय लेने की क्षमता को लेकर उठे सवाल अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी डेटा के प्रबंधन को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन गए हैं।
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