रेलूराम हत्याकांड: सोनिया-संजीव की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जस्टिस दत्ता बोले- दोबारा फांसी की सजा भी सुना सकता हूं
नई दिल्ली। रेलूराम पूनिया हत्याकांड के दोषी सोनिया और संजीव को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ ने करीब दो घंटे तक मामले में दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने दोषियों के समय पूर्व रिहाई के दावे पर कड़ी टिप्पणी की।
दोषियों की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया था कि सरकार की बनाई नीति के तहत समय पूर्व रिहाई उनका संवैधानिक अधिकार है। इस पर जस्टिस दत्ता ने सवाल किया कि वे बताएं कि समय पूर्व रिहाई किस तरह उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष दायर दया याचिका पर फैसला लेने के लिए अनुच्छेद 72 के तहत कोई निश्चित समय सीमा नहीं है।
जस्टिस दत्ता ने कहा कि दया याचिका के निपटारे में देरी का मतलब यह नहीं है कि किसी दोषी को समय पूर्व रिहाई या किसी अन्य रियायत का अधिकार मिल जाता है। सुनवाई के दौरान उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “रिहाई तो छोड़िए, मैं आपको फिर से फांसी की सजा भी सुना सकता हूं।”
क्या है रेलूराम हत्याकांड?
अगस्त 2001 में हरियाणा के लितानी गांव स्थित एक फार्म हाउस में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया, उनकी पत्नी कृष्णा देवी, बेटे सुनील, बहू शकुंतला, बेटी प्रियंका, पोते लोकेश और पोतियों शिवानी तथा 45 दिन की प्रीति की हत्या कर दी गई थी।
मई 2004 में हिसार की अदालत ने सोनिया और संजीव को इस मामले में फांसी की सजा सुनाई थी। वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी सजा को बरकरार रखा। बाद में उनकी फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया।
हाई कोर्ट की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे परिजन
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 9 दिसंबर 2025 के अपने फैसले में सोनिया और संजीव को अंतरिम जमानत दी थी। इसके खिलाफ रेलूराम पूनिया के भतीजे जितेंद्र और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। इसी याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। फिलहाल मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं की गई है।
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