चंपत राय के बयान पर उठे सवाल: राम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास और कांग्रेस की भूमिका पर चर्चा
राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर चंपत राय के एक नए बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उनके बयान को योगी आदित्यनाथ द्वारा राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ और महंत दिग्विजयनाथ की भूमिका के दावे के संदर्भ में देखा जा रहा है। चंपत राय ने अपने बयान में कांग्रेस नेता दाऊदयाल खन्ना का उल्लेख करते हुए जन्मभूमि आंदोलन की शुरुआत से जुड़ी एक अलग कड़ी सामने रखी है।
योगी आदित्यनाथ महंत दिग्विजयनाथ और बाद में अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ को राम जन्मभूमि आंदोलन से जोड़ते हुए उनके योगदान का उल्लेख करते रहे हैं। वहीं चंपत राय दाऊदयाल खन्ना की भूमिका की बात कर रहे हैं। दाऊदयाल खन्ना 1960 के दशक में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे थे। बाद में उन्होंने इंदिरा गांधी को काशी, मथुरा और अयोध्या की मुक्ति के लिए पत्र लिखा था।
दिए गए विवरण के मुताबिक, इससे पहले वर्ष 1948 में कांग्रेस के समर्थन से चुनाव जीतने वाले बाबा राघवदास ने भी राम जन्मभूमि को मुक्त कराने की बात कही थी। वर्ष 1949 में उनकी अगुवाई में राम जन्मभूमि परिसर में मूर्तियां रखे जाने का उल्लेख भी किया जाता है। उन्होंने कांग्रेस के समर्थन से राम के नाम को चुनावी मुद्दे के रूप में इस्तेमाल करते हुए समाजवादी नेता आचार्य नरेंद्र देव को चुनाव में हराया था।
चंपत राय के बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि वह राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में कांग्रेस नेताओं की भूमिका को प्रमुखता से क्यों सामने ला रहे हैं। साथ ही यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या उनके बयान के पीछे राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर कोई नाराजगी है।
अब यह चर्चा भी हो रही है कि चंपत राय आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और क्या कहेंगे और क्या उनके अगले बयान से राम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास से जुड़ी कोई और नई जानकारी या बहस सामने आएगी।
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