गौमांस प्रकरण में विहिप जिला मंत्री की सक्रियता पर सवाल, जांच से पहले निष्कर्ष और पुलिस पर दबाव कितना उचित?

Thursday, September 24, 2026 - 13:25
Updated: 3 days ago
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गौमांस प्रकरण में विहिप जिला मंत्री की सक्रियता पर सवाल, जांच से पहले निष्कर्ष और पुलिस पर दबाव कितना उचित?

हाथरस। गौमांस के आरोप से जुड़े वाहन प्रकरण में विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री प्रवीण खंडेलवाल की सक्रियता अब कई सवालों के घेरे में है? गोवंश संरक्षण के नाम पर वाहन रोकना, उसमें रखे मांस की प्रकृति स्वयं तय करना और फिर पुलिस-प्रशासन से मनमाफिक कार्रवाई की अपेक्षा करना आखिर किस अधिकार के तहत उचित है? क्या अब संगठनों के पदाधिकारी ही मौके पर जांच अधिकारी और फैसले लेने वाले बनेंगे? कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन की है, किसी संगठन की नहीं।विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया कि गोवंश से जुड़े मामले में शिकायत के बाद पुलिस अधीक्षक ने छह दिन में जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिली। संगठन ने निष्पक्ष जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। जांच में देरी पर सवाल उठाना अलग बात है, लेकिन क्या इसके लिए पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति उचित है?प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वाहन में रखे मांस को गौमांस बताने का आधार क्या था? क्या सक्षम एजेंसी की जांच से इसकी पुष्टि हुई थी, या जिला मंत्री के पास कोई ऐसी दूरदृष्टि है, जो जांच रिपोर्ट से पहले ही मांस की प्रकृति तय कर सकती है? यदि जांच लंबित थी, तो किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की जल्दबाजी क्यों? कानून की प्रक्रिया साक्ष्यों और अधिकृत जांच से चलती है, न कि दावों और सड़क पर बने माहौल से।पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर प्रदर्शन और थाना हाथरस गेट प्रभारी नितिन कसाना  को हटाने की कथित मांग ने भी सवाल खड़े किए हैं। यदि पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति है तो शिकायत और वैधानिक जांच का रास्ता मौजूद है। जिलाधिकारी के आदेश पर मजिस्ट्रेटियल जांच की बात सामने आने के बीच यह सवाल भी अहम है कि जांच पूरी होने से पहले अधिकारी पर कार्रवाई की मांग क्या निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने का दबाव नहीं बन सकती? पुलिस पर लाठीचार्ज के आरोपों की भी तथ्यात्मक पुष्टि आवश्यक है।गोवंश संरक्षण संवेदनशील विषय है और कानून के दायरे में शिकायत करना हर नागरिक का अधिकार है। मगर मांस से भरे वाहनों को रोकना, उनकी जांच करना और कार्रवाई तय करना अधिकृत एजेंसियों का काम है। संगठन के पदाधिकारी न तो पुलिस अधिकारी हैं और न ही प्रशासनिक अधिकारी, जो जनपद को अपनी शर्तों पर चलाएं। जनहित के नाम पर कानून की प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता। कानून का काम कानून को करने देना ही व्यवस्था और निष्पक्षता के हित में है।प्रेस वार्ता में विश्व हिंदू परिषद   ने कहा कि वह अब तक धैर्यपूर्वक जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा करता रहा है। शीघ्र रिपोर्ट और अपेक्षित कार्रवाई न होने पर आगरा में अशोक सिंघल जन्म शताब्दी कार्यक्रम के बाद क्षेत्र, प्रांत और विभागीय अधिकारियों के निर्देशन में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन किया जा सकता है। संगठन ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई और रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की। प्रेसवार्ता में विभाग संगठन मंत्री उमाकांत, जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सक्सेना, जिला मंत्री प्रवीण खंडेलवाल, जिला सह मंत्री अमरदीप, बजरंग दल जिला संयोजक अनमोल अग्निहोत्री और जिला गौरक्षा प्रमुख मनोज वार्ष्णेय मौजूद रहे।अब देखना यह है कि जांच रिपोर्ट तथ्यों के आधार पर क्या तस्वीर सामने लाती है और पुलिस-प्रशासन इस मामले में क्या आधिकारिक रुख स्पष्ट करता है। सवाल केवल रिपोर्ट का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है जिसमें जांच एजेंसियां स्वतंत्र होकर काम करें और कोई भी संगठन कानून से ऊपर होने का संदेश न दे।

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