जम्मू-कश्मीर की आर्थिक और विकास प्राथमिकताएं राष्ट्रीय मंच पर रखीं, उमर अब्दुल्ला ने वित्त और कृषि विपणन पर दिया जोर
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विकसित भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा में प्रदेश की आर्थिक जरूरतों और विकास प्राथमिकताओं को प्रभावी समर्थन देने पर जोर दिया। शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय उच्चस्तरीय सम्मेलन के समापन समारोह में शामिल होते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विकास से जुड़े वित्तीय पहलुओं पर चर्चा की।
‘विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में देश की आर्थिक वृद्धि के लिए संसाधन जुटाने और राज्यों तथा विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों की विकास जरूरतों के अनुरूप वित्तीय रणनीति तैयार करने पर विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन में राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों तथा वित्त सचिवों ने हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में विकास वित्त, कृषि विपणन और नवीकरणीय ऊर्जा को महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, आर्थिक गतिविधियों और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को गति देने के लिए प्रदेश को दीर्घकालिक वित्तीय संसाधनों की जरूरत है। सम्मेलन में विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने और उनके प्रभावी उपयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए वित्तपोषण को लेकर भी सम्मेलन में विचार-विमर्श हुआ। जम्मू-कश्मीर के लिए कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में बेहतर विपणन व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया गया। कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए वित्तीय संसाधनों की भूमिका पर चर्चा की गई।
इसके अलावा ऊर्जा संक्रमण और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता भी सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रही। विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने ऊर्जा क्षेत्र की बदलती जरूरतों तथा संक्रमण के लिए आवश्यक निवेश को लेकर अपने विचार रखे।
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