चीन का एआई पर दो टूक जवाब: ‘डर ना फैलाएं’, सुरक्षा जरूरी लेकिन विकास की रफ्तार भी नहीं रुकनी चाहिए
बीजिंग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संभावित खतरों को लेकर दुनियाभर में चल रही बहस के बीच चीन ने एआई के विकास की रफ्तार कम करने के सुझाव का विरोध किया है। चीन ने कहा है कि एआई की सुरक्षा को लेकर नियम और उपाय जरूरी हैं, लेकिन इसके नाम पर डर फैलाना या तकनीक के विकास को रोकना सही नहीं है।
यह बहस उस समय तेज हुई जब एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोदेई ने एआई के संभावित खतरों को देखते हुए इसके विकास की गति कम करने का सुझाव दिया। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी पक्षों को एआई सुरक्षा के मुद्दे पर मिलकर काम करना चाहिए। प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि डर फैलाने और टकराव बढ़ाने से वैश्विक एआई नियमन की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचेगा।
चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अमोदेई के सुझाव को एआई क्षेत्र में नए शीत युद्ध से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि इसके पीछे अमेरिका का एआई तकनीक पर अपना वर्चस्व कायम रखने का उद्देश्य हो सकता है। चीन का रुख है कि एआई सुरक्षा के लिए नियम बनाए जाएं, लेकिन इससे तकनीक के तेज विकास को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एआई के विकास की रफ्तार कम करने के विचार का विरोध किया है। ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका ने एआई के विकास को धीमा किया तो वह चीन से काफी पीछे रह जाएगा। उन्होंने एआई के खिलाफ सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर देते हुए इसके विकास को रोकने की कोशिशों को गलत बताया।
ट्रंप और शी जिनपिंग की सितंबर के अंत में संभावित मुलाकात के दौरान एआई नियमन और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने के आसार हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन को ओपन-सोर्स एआई के क्षेत्र में अग्रणी बनाने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में एआई सुरक्षा और तकनीकी प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में अमेरिका और चीन के बीच बातचीत का अहम मुद्दा बन सकती है।
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