बीना स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल, प्लेटफॉर्म पर बेखौफ घूम रहे सांड
बीना रेलवे स्टेशन पर आवारा पशुओं और सांडों की लगातार आवाजाही यात्रियों के लिए परेशानी और सुरक्षा का खतरा बनती जा रही है। स्टेशन पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री परिवार, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों के साथ पहुंचते हैं। कई यात्रियों को ट्रेनों के इंतजार में देर रात तक प्लेटफॉर्म पर रुकना पड़ता है, ऐसे में आवारा सांडों की मौजूदगी चिंता बढ़ा रही है।
यात्रियों के अनुसार, देर रात प्लेटफॉर्म पर भोजन करने या ट्रेन का इंतजार करने के दौरान सांडों के झुंड घूमते नजर आते हैं। हाल ही में एक सांड के यात्रियों की ओर बढ़ने से प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। यात्रियों ने किसी तरह उसे दूर भगाने का प्रयास किया। कुछ देर बाद स्थिति सामान्य हुई, लेकिन सांड प्लेटफॉर्म से बाहर नहीं गया।
यात्रियों का कहना है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए अचानक सामने आ जाने वाले सांड से बचना मुश्किल हो सकता है। उनका आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर आवारा पशुओं की आवाजाही कोई एक-दो दिन की समस्या नहीं है, बल्कि लगातार बनी हुई है।
एक ओर रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और यात्री सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बीना जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर यात्रियों को आवारा पशुओं से बचने की चिंता करनी पड़ रही है। यात्रियों का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
यात्रियों ने रेल प्रशासन से स्टेशन के प्रवेश मार्गों की निगरानी, आवश्यक बैरिकेडिंग, नियमित गश्त और आवारा पशुओं की आवाजाही रोकने के प्रभावी इंतजाम करने की मांग की है। साथ ही स्थानीय प्रशासन के सहयोग से समस्या का स्थायी समाधान किए जाने की अपील की गई है।
यात्रियों का कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय रेल प्रशासन को समय रहते कदम उठाने चाहिए, ताकि स्टेशन पर आने वाला हर यात्री सुरक्षित माहौल में अपनी ट्रेन का इंतजार कर सके।
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