SIR में अब तक 13.37 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर, महाराष्ट्र में सबसे बड़ी संख्या; दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रतिशत कटौती
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत अब तक जारी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर 13.37 करोड़ से अधिक नाम शामिल नहीं किए गए हैं। हालांकि यह अंतिम कटौती नहीं मानी जा सकती, क्योंकि ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के बाद पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़े जा सकते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, संख्या के लिहाज से महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए हैं। राज्य में पहले 9.78 करोड़ से अधिक मतदाता थे, जबकि ड्राफ्ट सूची में करीब 7.72 करोड़ मतदाता रह गए। इस तरह लगभग 2.06 करोड़ नाम फिलहाल ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं हैं। दिल्ली में 1.45 करोड़ से अधिक मतदाताओं की पिछली सूची के मुकाबले ड्राफ्ट सूची में करीब 97.53 लाख नाम दर्ज हुए, यानी लगभग 47.56 लाख नाम बाहर हुए।
प्रतिशत के लिहाज से दिल्ली में सबसे बड़ी कमी दर्ज की गई है। यहां कुल मतदाताओं की संख्या में करीब 32.8 प्रतिशत की कमी हुई है। इसके बाद दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में करीब 29.6 प्रतिशत तथा तेलंगाना में करीब 21.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा करीब 21.1 प्रतिशत
अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में करीब 1.07 करोड़, उत्तर प्रदेश में करीब 1.54 करोड़, तमिलनाडु में करीब 67 लाख, पश्चिम बंगाल में करीब 83 लाख, राजस्थान में करीब 41.85 लाख और मध्य प्रदेश में करीब 42.74 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हैं। अलग-अलग राज्यों में कटौती का प्रतिशत वहां की कुल मतदाता संख्या के आधार पर अलग
दिल्ली के मामले में ड्राफ्ट सूची में बाहर हुए 47.56 लाख मतदाताओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया घर-घर जाकर कराए गए सत्यापन और प्राप्त गणना प्रपत्रों के आधार पर की गई है।
SIR को लेकर राजनीतिक विवाद भी जारी है। आलोचक बड़ी संख्या में नाम बाहर होने को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि निर्वाचन आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में बनाए रखना और अपात्र, मृत, स्थानांतरित या दोहरे नामों को हटाकर सूची को अद्यतन करना है। अंतिम आंकड़े दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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