भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा कोर्ट एक्शन, SDM समेत 11 के खिलाफ गैर-जमानती वारंट
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) अदालत ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने मामले में नामजद 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। अदालत ने पुलिस को सभी आरोपियों को 12 अगस्त से पहले गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।
जिन लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने की जानकारी सामने आई है, उनमें तत्कालीन SDM संजीत कुमार, तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दरोगा अंकित आर्यन, हरिश्चंद्र कुमार, STF जवान अक्षय कुमार और विकास कुमार समेत अन्य लोग शामिल हैं। मामले में STF जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।
गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग को लेकर अधिवक्ता संजीव कुमार की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में अब तक हुई कार्रवाई, जांच रिपोर्ट और प्राथमिकी में नामजद आरोपियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी की गई थी। सुनवाई के बाद अदालत ने नामजद आरोपियों के खिलाफ NBW जारी करने का आदेश दिया।
मामला 15 जून की सुबह की घटना से जुड़ा है। बताया गया कि भरत भूषण तिवारी ने उस दौरान फेसबुक लाइव किया था। लाइव वीडियो में वह एक सुनसान स्थान पर दिखाई दे रहा था, जहां उसके आसपास भोजपुर पुलिस और STF के जवान मौजूद थे। वीडियो में पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ जैकेट और हथियारों के साथ नजर आ रहे थे।
लाइव के दौरान भरत भूषण तिवारी ने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया था कि वह कोई अपराधी नहीं है और इसके बावजूद पुलिस टीम उसे पकड़ने पहुंची है। वीडियो के अंतिम हिस्से में उसने पुलिस की ओर अपना हथियार फेंकने और सरेंडर करने की बात कही, जिसके बाद लाइव बंद हो गया।
वहीं पुलिस का दावा है कि सरेंडर करने के बाद भरत ने दोबारा पिस्टल उठाकर फायरिंग करने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें उसके पैरों में गोली लगी।
घटना के बाद भरत भूषण तिवारी के परिजनों और समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए थे। अब अदालत की ओर से 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
अदालत ने 12 अगस्त से पहले सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पेश करने का निर्देश दिया है। ऐसे में तय समयसीमा के भीतर गिरफ्तारी और आरोपियों को कोर्ट में पेश करना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। मामले में आगे की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट के आधार पर घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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