नेताजी की बेटी अनीता पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट, केंद्र को नोटिस; टोक्यो से अस्थियां भारत लाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बी. फाफ की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियों को भारत लाकर पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने की मांग की गई है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अनीता फाफ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अनीता अपने पिता का अंतिम संस्कार भारत में पूरे सम्मान और गरिमा के साथ करना चाहती हैं।
मार्च में भी सामने आया था मामला
इससे पहले मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी के परपोते आशीष राय की ऐसी ही याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अगर नेताजी की मुख्य वारिस और बेटी अनीता फाफ खुद सामने आती हैं, तो मामले पर कानूनी कदम उठाया जा सकता है। इसके बाद अनीता फाफ ने शीर्ष अदालत का रुख किया।
1945 में नेताजी के लापता होने के बाद से उनकी मृत्यु और अवशेषों को लेकर कई तरह के दावे और धारणाएं सामने आती रही हैं। जापान के टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में उनकी कथित अस्थियां रखे होने की बात लंबे समय से कही जाती रही है। अब अनीता फाफ की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी होने से इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर है।
टीएमसी के बैंक खातों पर रोक, सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों पर लगी रोक से जुड़े कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्न बी. वराले की पीठ ने हाईकोर्ट के निर्देशों में बदलाव करने से मना कर दिया।
हालांकि, अदालत ने टीएमसी को अपनी आपत्तियां विशेष अधिकारी के सामने दर्ज कराने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
रोजमर्रा के खर्चों के लिए सीमित राहत
इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने पार्टी को रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्चों के लिए बैंक खातों से धन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। हालांकि, यह प्रक्रिया अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की निगरानी में होगी। अन्य अनधिकृत लेनदेन पर रोक जारी रहेगी।
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