ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक राज्यसभा से पारित, INDIA ब्लॉक के सांसदों ने किया वॉकआउट
संसद के मानसून सत्र के 17वें दिन मंगलवार को ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 राज्यसभा से भी पारित हो गया। इससे पहले सोमवार को लोकसभा ने इसे मंजूरी दी थी। विधेयक में विभिन्न न्यायाधिकरणों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति के लिए नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन (NTC) गठित करने का प्रावधान है।
विपक्षी सांसदों ने किया वॉकआउट
विधेयक पर चर्चा के दौरान INDIA ब्लॉक के सांसदों ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने की अनुमति नहीं मिलने के बाद विपक्षी सांसदों ने विरोध जताया और सदन से बाहर चले गए।
इससे पहले विपक्षी दल छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग कर रहे थे। इन मुद्दों को लेकर मंगलवार को दोपहर से पहले राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित भी हुई।
विधेयक में नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन का प्रावधान
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि ट्रिब्यूनल लोगों को तेजी से न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने 2016 में ट्रिब्यूनल के युक्तिकरण की प्रक्रिया शुरू की थी और इसके बाद 2021 में ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम लाया गया।

मेघवाल के अनुसार, नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन विधेयक का प्रमुख आधार है। प्रस्तावित आयोग में दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्य होंगे। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश या हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाएगी। सरकार का कहना है कि आयोग के जरिए नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, स्वतंत्र और योग्यता आधारित बनाया जाएगा।
विपक्ष ने सदन में की नारेबाजी
दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने की अनुमति देने की मांग की। सभापति ने सदस्यों से केवल विधेयक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का आग्रह किया।
विपक्षी सांसदों ने ‘एलओपी को बोलने दो’ के नारे लगाए। इसके बाद INDIA ब्लॉक के सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
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