मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा पर सवाल, पुरानी बसों पर नया स्टिकर लगाकर चलाने की तैयारी का आरोप
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत के साथ ही बसों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। योजना का उद्देश्य यात्रियों को सुलभ, सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बस सेवा उपलब्ध कराना बताया गया है। योजना के तहत बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और वाहन की लाइव लोकेशन ट्रैक करने जैसी तकनीकी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
इसी बीच आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ अधिकारी पुरानी बसों पर नया स्टिकर लगाकर उन्हें मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत मार्गों पर चलाने की तैयारी कर रहे हैं। सवाल यह उठाया जा रहा है कि यदि पुरानी बसों को केवल नए नाम और स्टिकर के साथ सड़क पर उतारा जाता है, तो उन्हें अत्याधुनिक बस सेवा का हिस्सा कैसे माना जाएगा।
योजना के तहत बसों की निगरानी के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम, कमांड-कंट्रोल सेंटर और लाइव ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है। बसों में सीसीटीवी कैमरे और आपात स्थिति में सहायता के लिए पैनिक बटन जैसी सुविधाएं भी बताई गई हैं।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत 25 सितंबर 2026 से हुई है। पहले चरण में सात शहरों में 351 बसों का संचालन शुरू किया गया है और आगे प्रदेश में बसों का बड़ा नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
ऐसे में पुरानी बसों को नए स्टिकर के साथ सेवा में शामिल किए जाने के आरोप ने योजना की वास्तविक तैयारियों और बसों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बसों में योजना के तहत निर्धारित सुरक्षा और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो यात्रियों को मिलने वाली सेवा की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल इस आरोप पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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