भोपाल में रहवासी इलाकों की व्यावसायिक गतिविधियों पर फिर चलेगा सीलिंग अभियान, सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बरकरार रखी
भोपाल। रहवासी इलाकों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भोपाल में सीलिंग की कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। 22 सितंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने आवासीय क्षेत्रों में अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने और अपने निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मामले की सुनवाई करीब तीन घंटे चली। सुनवाई के दौरान उन शिकायतों का भी उल्लेख हुआ, जिनमें आरोप लगाया गया था कि नगर निगम द्वारा कुछ प्रतिष्ठानों को सील किए जाने के बाद वे दोबारा खुल गए। कोर्ट ने इस तरह की स्थिति पर गंभीरता जताते हुए सीलिंग से जुड़े निर्देशों के प्रभावी पालन पर जोर दिया।
भोपाल नगर निगम की ओर से बड़ी संख्या में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए थे, जबकि आधिकारिक तौर पर 10 प्रतिष्ठानों को सील किए जाने की जानकारी दी गई।
मामला उन व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ा है, जो आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित क्षेत्रों में संचालित की जा रही हैं। ऐसे क्षेत्रों में स्पा, ब्यूटी पार्लर, कोचिंग सेंटर, सुपरस्टोर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। कोर्ट के निर्देशों के तहत जहां भूमि उपयोग स्पष्ट रूप से आवासीय है, वहां अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
इसी सुनवाई के दौरान 21 साल से लंबित भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को जारी करने की अनुमति भी राज्य सरकार को दी गई। हालांकि अंतिम मास्टर प्लान को लागू करने से पहले न्यायालय के समक्ष आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने और उसकी अनुमति लेने की शर्त बताई गई है।
मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को आगे बढ़ने की अनुमति मिलने से भोपाल में भूमि उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। वहीं, रहवासी क्षेत्रों में अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ सीलिंग और अन्य कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी बनी हुई है।
इस पूरे मामले में अब नगर निगम की कार्रवाई और उसके अनुपालन पर नजर रहेगी। खास तौर पर सील किए गए प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने की शिकायतों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय के निर्देशों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है।
What's Your Reaction?
Like
1
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)