80s फोटो ट्रेंड से 45 साल पुरानी हार चोरी का खुलासा? उज्जैन की वायरल कहानी पूरी तरह फर्जी
उज्जैन। सोशल मीडिया पर एक अखबार की कथित कटिंग तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 1980 में सोने का हार चोरी करने वाली महिला को 45 साल बाद एआई से बनाई गई अपनी पुरानी तस्वीर के जरिए पहचान लिया गया। दावा है कि महिला ने 80 के दशक के फोटो ट्रेंड के तहत अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, जिसे देखकर सुनार ने उसे पहचान लिया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
यह पूरी कहानी मनगढ़ंत है। उज्जैन में ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं हुई है। वायरल कटिंग और उसमें इस्तेमाल की गई तस्वीरों को लेकर भी जांच में इनके एआई से तैयार किए जाने के संकेत मिले हैं।
वायरल कटिंग में दावा किया गया है कि महिला ने 1980 में एक सुनार की दुकान से हार चुराया था और करीब 45 साल बाद अपनी एआई से बनाई गई पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। कथित तौर पर तस्वीर देखकर सुनार ने उसे पहचान लिया और पुलिस को सूचना दी। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई विश्वसनीय पुलिस रिकॉर्ड या स्वतंत्र रिपोर्ट नहीं मिली।
पड़ताल के दौरान वायरल कटिंग में कई विसंगतियां भी सामने आईं। इसमें घटना से जुड़े लोगों के नाम, संबंधित थाने, एफआईआर या केस नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं दी गई थीं। उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने भी ऐसी किसी घटना से इनकार किया है।
जांच में वायरल तस्वीरों और कथित अखबार की कटिंग के एआई-जनरेटेड होने के संकेत भी मिले। इसके अलावा, ऐसी घटना की पुष्टि करने वाली कोई विश्वसनीय खबर सामने नहीं आई। ऐसे में सोशल मीडिया पर 80 के दशक के फोटो ट्रेंड से जोड़कर शेयर की जा रही यह कहानी फर्जी है और लोगों को भ्रामक जानकारी देने के लिए प्रसारित की जा रही है।
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