नेपाल में तबाही के बीच 61 श्रद्धालु लापता, 600 से ज्यादा मौतें; मलबे में जिंदगी की तलाश जारी
नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। शनिवार तक प्राकृतिक आपदा में 600 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें, पुल, वाहन, इमारतें और जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
आपदा के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाली सेना के 5,000 से अधिक जवानों समेत 11,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों में जुटे हैं। अब तक करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ऊपरी त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे सैकड़ों लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
चारों तरफ मलबा और कीचड़
बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों में तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा है। अस्पतालों के बाहर लोग अपने लापता परिजनों की तस्वीरें लेकर उनकी तलाश कर रहे हैं। कई परिवार मलबे और कीचड़ के बीच अपने सामान और अपनों के बारे में सुराग खोज रहे हैं। राहत शिविरों में बच्चों, बुजुर्गों और घायलों को उपचार और जरूरी सहायता दी जा रही है।
मुंबई के 61 श्रद्धालुओं से संपर्क टूटा
इस भीषण आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का दल भी लापता बताया जा रहा है। डॉ. मिलिंद चितले के नेतृत्व में यह दल 23 अगस्त को यात्रा के लिए रवाना हुआ था। 25 अगस्त की शाम को टिमुरे पहुंचने के बाद परिवारों से उनका संपर्क टूट गया। कुछ सदस्यों की आखिरी डिजिटल लोकेशन 26 अगस्त की सुबह सीमा चौकी के पास मिली थी।
परिजनों की चिंता बढ़ी
श्रद्धालुओं से संपर्क नहीं होने के बाद उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। प्रभावित सीमावर्ती इलाकों में राहत और बचाव दल उनकी तलाश में जुटे हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में फिर मध्यम बारिश की संभावना जताई है, जिससे मलबे में फंसे लोगों की तलाश और राहत अभियान में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
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