मथुरा का एआरटीओ कार्यालय बना दलालों का अड्डा? अधिकारियों और दलालों की कथित मिलीभगत पर उठे सवाल
भानु प्रकाश
मथुरा। प्रदेश सरकार जहां भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ाने के दावे कर रही है, वहीं मथुरा के एआरटीओ कार्यालय में कथित अनियमितताओं और दलाली के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से दलालों का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे आम लोगों को अपने काम के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि लर्निंग लाइसेंस को स्थायी लाइसेंस में परिवर्तित कराने के नाम पर कार्यालय में सक्रिय कथित दलालों के माध्यम से अतिरिक्त रकम वसूली जाती है। इसी तरह विद्यालयों और निजी बसों के वाहनों में सीटों की संख्या बढ़ाने, फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कराने और भारी वाहन लाइसेंस बनवाने के नाम पर भी कथित तौर पर मोटी रकम लिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। भारी वाहन लाइसेंस के लिए 12 से 15 हजार रुपये तक की रकम लिए जाने का दावा भी किया जा रहा है।
सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप है कि कुछ ट्रैवल एजेंसियों में एक ही चेसिस नंबर से जुड़ी कई गाड़ियों के संचालन की शिकायतें हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क सुरक्षा और यात्रियों की जान से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
कार्यालय में सक्रिय कथित दलालों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि उन्हें कार्यालय परिसर में इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं कि आम लोग कई बार उन्हें विभागीय कर्मचारी या अधिकारी समझ लेते हैं। कुछ लोगों ने अधिकारियों के रिश्तेदारों के भी इस कथित नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं।
एआरटीओ कार्यालय पर लगाए गए ये आरोप फिलहाल जांच का विषय हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि, यदि सरकारी कार्यालय में इस तरह की दलाली या अनियमितता की पुष्टि होती है तो यह सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर गंभीर सवाल खड़े करेगी।
मामले में मांग उठ रही है कि शासन और परिवहन विभाग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए, कार्यालय में सक्रिय दलालों की भूमिका की जांच हो और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। खासकर फिटनेस और वाहन संबंधी मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध सड़क पर चलने वाले वाहनों और आम नागरिकों की सुरक्षा से है।
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