आईएसआईएस साजिश मामले में एनआईए कोर्ट का फैसला, सैयद फासिउर रहमान को 7 साल की सश्रम कैद
बेंगलुरु। अल-हिंद आईएसआईएस आतंकी साजिश मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने सैयद फासिउर रहमान उर्फ सैयद फसीह उर रहमान को सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 48 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक, मामले में साजिश का कथित उद्देश्य लक्षित हत्याओं के जरिए सांप्रदायिक तनाव भड़काना और प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस के एजेंडे को आगे बढ़ाना था।
एनआईए की जांच के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी मेहबूब पाशा ने बेंगलुरु के गुरप्पनपाल्या स्थित अपने घर पर कई बैठकें की थीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन बैठकों में लक्षित हत्याओं की साजिश रची गई थी। साथ ही आईएसआईएस के लिए एक अलग प्रांत स्थापित करने की योजना पर भी चर्चा होने की बात सामने आई थी।
जांच के मुताबिक, सैयद फासिउर रहमान इन बैठकों में शामिल था। उस पर अल-हिंद समूह के सदस्यों के जंगल कैंप प्रशिक्षण से संबंधित सामान खरीदने का भी आरोप था। एनआईए के अनुसार, उसने डेकाथलॉन स्टोर से टेंट और चाकू खरीदे थे। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे दोषी ठहराते हुए सात साल की सश्रम कैद और 48 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
यह मामला कर्नाटक पुलिस ने 10 जनवरी 2020 को बेंगलुरु में दर्ज किया था। इसके बाद एनआईए ने 23 जनवरी 2020 को जांच अपने हाथ में लेते हुए मामला दोबारा दर्ज किया। एजेंसी के अनुसार, अब तक 20 आरोपियों के खिलाफ तीन आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
इससे पहले हनीफ खान को 14 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान अपराध स्वीकार करने के बाद दोषी ठहराया गया था। मामले की सुनवाई अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी। एनआईए ने बताया कि जांच अभी जारी है और एजेंसी उस कथित ऑनलाइन हैंडलर का पता लगाने में जुटी है, जो आतंकी मॉड्यूल को तैयार करने और उसकी गतिविधियों के समन्वय में शामिल था।
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