बीसीसीआई में पारदर्शिता और नैतिकता बनाए रखने के लिए याचिका दायर
भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के सचिव और एपेक्स काउंसिल के समक्ष एक औपचारिक याचिका सौंपी गई है, जिसका उद्देश्य 18 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली वार्षिक आम बैठक (AGM) से पूर्व पारदर्शिता, नैसर्गिक न्याय और नैतिक मानकों को सुनिश्चित करना है।
उपेंद्र यादव द्वारा दायर इस याचिका में मांग की गई है कि बीसीसीआई के उपाध्यक्ष श्री राजीव शुक्ला को 'हितों के टकराव' से जुड़ी लंबित जांच पूरी होने तक एजीएम की बैठकों, विचार-विमर्श और मतदान प्रक्रियाओं से अस्थायी रूप से दूर रखा जाए। इस मामले की समीक्षा बीसीसीआई के लोकपाल एवं आचार अधिकारी, पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा द्वारा की जा रही है। याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक विश्वास और संस्थागत निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए बीसीसीआई के संविधान के नियम 38 और संवैधानिक सिद्धांतों का सख्ती से पालन करना आवश्यक है।
एक निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए याचिका में की गई मुख्य मांगें:
लंबित जांच का सामना कर रहे अधिकारियों को अंतिम निर्णय आने तक आधिकारिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से अस्थायी रूप से अलग रखा जाए।
राष्ट्रीय पर्यवेक्षण और राज्य संघों की भूमिकाओं के बीच हितों के टकराव को रोककर स्वतंत्र प्रशासन सुनिश्चित किया जाए।
प्रमुख नीतियों, नियुक्तियों और चुनावों से संबंधित बैठकों में पारित प्रस्तावों की निष्पक्षता बनाए रखी जाए।
भारतीय क्रिकेट प्रशासन के सभी स्तरों पर जवाबदेही और पारदर्शी तंत्र को मजबूत किया जाए।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करना और संवैधानिक नैतिकता, निष्पक्षता तथा पारदर्शी नेतृत्व के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाना है।
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