37 साल बाद भी इंसाफ की आस: जम्मू में भूख हड़ताल पर बैठे पनुन कश्मीर के कार्यकर्ता, अलग मातृभूमि की मांग
जम्मू। विस्थापित कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन पनुन कश्मीर ने शनिवार को जम्मू में एक दिवसीय भूख हड़ताल कर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। जम्मू प्रेस क्लब के पास आयोजित इस प्रदर्शन में संगठन ने कश्मीरी पंडित समुदाय के नरसंहार को आधिकारिक रूप से मान्यता देने, इसके लिए विशेष कानून बनाने और घाटी में अलग मातृभूमि की स्थापना समेत कई मांगें उठाईं।
संगठन के अनुसार, यह भूख हड़ताल 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन की अगली कड़ी है। पनुन कश्मीर लंबे समय से 1990 में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन से जुड़े मामलों में न्याय, जवाबदेही और समुदाय के अधिकारों की मांग करता रहा है।
37 वर्षों से आधिकारिक मान्यता की मांग
पनुन कश्मीर के अध्यक्ष टीटो गंजू ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय पिछले 37 वर्षों से अपने साथ हुए नरसंहार को औपचारिक रूप से मान्यता देने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि संसद में इस विषय का उल्लेख होने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक इसे लेकर औपचारिक मान्यता नहीं दी गई है।
गंजू ने भारत के जेनोसाइड कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता होने का हवाला देते हुए कश्मीरी पंडितों के मामले के लिए विशेष नरसंहार कानून बनाने की मांग की। संगठन ने बताया कि उसने वर्ष 2020 में इस संबंध में एक विधेयक का प्रस्ताव भी रखा था। इसके साथ ही पनुन कश्मीर ने पूरे मामले की जांच और प्रस्तावित कानून पर विचार करने के लिए एक आयोग गठित किए जाने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उनसे जुड़े घटनाक्रमों पर न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए अलग मातृभूमि की स्थापना को भी अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)