होर्मुज से गुजरेंगे भारतीय टैंकर: जयशंकर-अराघची की बातचीत के बाद निकला रास्ता, भारत को बड़ी राहत

Thursday, March 12, 2026 - 11:34
0
होर्मुज से गुजरेंगे भारतीय टैंकर: जयशंकर-अराघची की बातचीत के बाद निकला रास्ता, भारत को बड़ी राहत

नई दिल्ली (आरएनआई): पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-इज़राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच भारत को बड़ी कूटनीतिक राहत मिली है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद सामने आया है।

सूत्रों के मुताबिक इस अनुमति के बाद कम से कम दो भारतीय तेल टैंकर — पुष्पक और परिमल — सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं। यह वही समुद्री मार्ग है जहां क्षेत्रीय तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। ऐसे में भारतीय टैंकरों को मिली यह राहत भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इससे पहले लाइबेरिया के झंडे वाला एक तेल टैंकर, जो सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर आ रहा था और जिसकी कमान एक भारतीय कप्तान के हाथ में थी, दो दिन पहले सुरक्षित रूप से होर्मुज से गुजरकर मुंबई बंदरगाह पहुंच चुका है। मौजूदा संकट के दौरान भारत पहुंचने वाला यह पहला जहाज माना जा रहा है।

दरअसल, अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब करीब 12वें दिन में पहुंच चुका है। लगातार बढ़ते तनाव के कारण पूरे क्षेत्र में समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है और वैश्विक तेल कीमतों में भी तेज उछाल देखा जा रहा है। ईरान ने इस दौरान होर्मुज से गुजरने वाले कई जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं और कहा है कि केवल वे जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं जो अमेरिका और इज़राइल के हितों से जुड़े नहीं हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 31 प्रतिशत है।

इस मार्ग में बाधा आने से इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है। दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पर तुरंत असर देखने को मिलता है।

रक्षा विश्लेषकों के अनुसार ईरान के पास एंटी-शिप मिसाइल, ड्रोन, तेज हमला करने वाली नौकाएं और समुद्री बारूदी सुरंगें जैसी क्षमताएं हैं, जिनकी मदद से वह पूरे होर्मुज क्षेत्र में जहाजों को निशाना बना सकता है। यही वजह है कि इस समुद्री मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में केवल भारतीय टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिलना भारत की संतुलित और स्वतंत्र कूटनीति का संकेत है। इससे युद्ध और संभावित नाकेबंदी के बीच भी भारत की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी।

Follow RNI News Channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaBPp7rK5cD6X

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
RNI News

Reportage News International (RNI) is India's growing news website which is an digital platform to news, ideas and content based article. Destination where you can catch latest happenings from all over the globe Enhancing the strength of journalism independent and unbiased.

Comments (0)

User