ट्रंप के दावों के बीच ईरान का कड़ा संदेश: मोजतबा खामेनेई बोले—मुआवजा दो या अंजाम भुगतो
तेहरान (आरएनआई)। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दुश्मन देशों को देना ही होगा, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। वहीं ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने स्पष्ट किया कि ईरान ने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की और देश अपनी रक्षा तब तक करता रहेगा जब तक इसकी आवश्यकता होगी।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार दावा कर रहे हैं कि 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष अब अपने अंतिम दौर में है और ईरान के पास पलटवार की ताकत नहीं बची है। हालांकि ईरान के शीर्ष नेतृत्व के ताजा बयानों से यह संकेत मिलता है कि तेहरान किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है।
मोजतबा खामेनेई ने अपने संदेश में कहा कि ईरान को हुए नुकसान की भरपाई दुश्मन देशों से कराई जाएगी। यदि वे मुआवजा देने से इनकार करते हैं तो ईरान उनकी उतनी संपत्ति जब्त करेगा जितनी वह उचित समझेगा, और यदि ऐसा भी संभव नहीं हुआ तो उनकी संपत्ति को नष्ट कर दिया जाएगा। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार यह संदेश उनके टेलीग्राम पोस्ट के आधार पर सामने आया है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध में मारे गए लोगों के खून का बदला जरूर लिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर ईरान अन्य मोर्चे भी खोल सकता है।
ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित लिखित संदेश में खामेनेई ने कहा कि तेहरान अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है और केवल उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाएगा जहां से ईरान पर हमले किए जाते हैं।
दूसरी ओर अमेरिका के रक्षा सचिव Pete Hegseth ने दावा किया है कि हालिया अमेरिकी हमलों में मोजतबा खामेनेई घायल हो गए हैं और उन्हें छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उनके अनुसार लगातार सैन्य अभियानों के कारण ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ रहा है।
यह तनाव तब और बढ़ गया जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान समेत कई शहरों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता Ali Khamenei सहित कई सैन्य कमांडर और नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
इस बीच विदेश मंत्री अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान अमेरिका से किसी युद्धविराम या वार्ता की मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब हमले हुए उस समय भी बातचीत जारी थी, इसलिए अब अमेरिका से बातचीत का कोई मतलब नहीं रह गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा जब तक अमेरिका यह नहीं समझ लेता कि यह युद्ध अवैध है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने इस रास्ते को बंद नहीं किया है, लेकिन वहां से गुजरने वाले जहाजों के बारे में अंतिम फैसला सेना ही लेती है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं की और हमले से पहले वह यूरेनियम भंडार कम करने पर भी सहमत था, लेकिन हमलों के बाद स्थिति बदल गई है।
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