पंजाब में ‘वारिस पंजाब दे’ की बढ़ती सक्रियता से बदल सकते हैं सियासी समीकरण, मालवा में बढ़ रहा प्रभाव

Saturday, August 29, 2026 - 13:23
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पंजाब में ‘वारिस पंजाब दे’ की बढ़ती सक्रियता से बदल सकते हैं सियासी समीकरण, मालवा में बढ़ रहा प्रभाव

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ‘वारिस पंजाब दे’ के राजनीतिक दल के रूप में सामने आने के बाद राज्य में सियासी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संगठन की सक्रियता खासकर ग्रामीण मालवा क्षेत्र में बढ़ती दिखाई दे रही है। युवाओं के बीच आयोजित कार्यक्रमों में भीड़ और संगठन की गतिविधियों ने पारंपरिक राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।

2024 के लोकसभा चुनाव में दो संसदीय सीटों पर मिली जीत के बाद संगठन का प्रभाव पंथक क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह ने खड़ूर साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 1,97,120 वोटों के अंतर से हराया था।

वहीं, फरीदकोट सुरक्षित सीट से सरबजीत सिंह खालसा ने 70,053 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। इन चुनावी नतीजों को पंथक मुद्दों और पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रति असंतोष से जोड़कर देखा गया था।

मालवा क्षेत्र में पंजाब की 69 विधानसभा सीटें आती हैं। ऐसे में यदि ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रभाव ग्रामीण इलाकों में आगे बढ़ता है तो कई विधानसभा सीटों पर मौजूदा राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। संगठन की गतिविधियां बढ़ने के साथ पारंपरिक दलों की रणनीति पर भी इसका असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

नशे के खिलाफ अभियान, बंदी सिंहों की रिहाई और सिख पहचान जैसे पंथक मुद्दों को संगठन प्रमुखता से उठा रहा है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ग्रामीण और पंथक सोच रखने वाले युवाओं के बीच इन मुद्दों को लेकर संगठन को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक पकड़ को सीटों में बदलना संगठन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

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