आईडीबीआई बैंक विनिवेश पर वित्त मंत्रालय की सफाई, कानून में हिस्सेदारी बेचने पर रोक नहीं
नई दिल्ली। आईडीबीआई बैंक में सरकारी हिस्सेदारी बेचने को लेकर उठ रहे कानूनी सवालों पर वित्त मंत्रालय ने सफाई दी है। मंत्रालय ने 2003 के कानून और दिल्ली हाईकोर्ट के 17 दिसंबर 2018 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने या बेचने से रोकने वाला कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय बजट 2003 पर चर्चा और आईडीबीआई (रिपील) अधिनियम, 2003 पर संसद में हुई बहस के दौरान सरकार की हिस्सेदारी घटाने पर रोक लगाने के लिए एक संशोधन प्रस्तावित किया गया था। हालांकि, यह संशोधन स्वीकार नहीं हुआ और अंतिम कानून का हिस्सा नहीं बना। मंत्रालय का कहना है कि इसलिए इस प्रस्ताव के आधार पर सरकार के विनिवेश के अधिकार पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन की याचिका खारिज कर दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि संबंधित कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो केंद्र सरकार को आईडीबीआई में अपनी हिस्सेदारी कम करने या बेचने से रोकता हो। अदालत ने यह भी माना था कि पहले दिए गए सरकारी बयानों के आधार पर सरकार को हिस्सेदारी बेचने से रोकने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सरकार ने अपने पक्ष में वर्ष 2016-17 और 2021-22 के केंद्रीय बजट भाषणों का भी हवाला दिया। इन बजटों में आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकारी हिस्सेदारी घटाने की नीति का उल्लेख किया गया था।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की एक सहायक कंपनी को 52,878.08 करोड़ रुपये में बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस सौदे के बाद बैंक के स्वामित्व में बड़ा बदलाव होने की संभावना है।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि 2003 के कानून, 2018 के न्यायिक फैसले और सरकार की पूर्व बजटीय घोषणाओं को देखते हुए रणनीतिक विनिवेश के रास्ते में कोई कानूनी बाधा नहीं है। हालांकि, सौदे की आगे की प्रक्रिया और आवश्यक नियामकीय औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही स्वामित्व हस्तांतरण की स्थिति स्पष्ट होगी।
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