एसआईआर के घेरे में पूर्व राजदूत रमेश चंदर, नागरिकता और पात्रता के अतिरिक्त दस्तावेज मांगे
पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान 75 वर्षीय पूर्व राजनयिक रमेश चंदर से नागरिकता और मतदाता के रूप में पात्रता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं। चंदर बेलारूस में भारत के राजदूत रह चुके हैं और जापान, ब्रिटेन तथा चेक गणराज्य में भी महत्वपूर्ण राजनयिक पदों पर सेवाएं दे चुके हैं।
जालंधर के देओल नगर निवासी रमेश चंदर को 27 अगस्त को लाडोवाली रोड स्थित निर्वाचन कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है। चंदर का कहना है कि वह अपना आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज पहले ही बूथ स्तरीय अधिकारी को उपलब्ध करा चुके हैं। इसके बावजूद उनसे नागरिकता और पात्रता से जुड़े अतिरिक्त प्रमाण मांगे गए हैं।
चंदर के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने जालंधर में लगातार चुनावों में मतदान किया है। उन्होंने 2007, 2012, 2014, 2017, 2022 और 2024 के चुनावों में मतदान किया था। ऐसे में अब मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाने को लेकर उन्होंने हैरानी जताई है।
जालंधर में जन्मे और यहीं पले-बढ़े
रमेश चंदर का जन्म और पालन-पोषण जालंधर में हुआ। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा भी जालंधर से हासिल की। दिसंबर 2010 में विदेश सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद से वह करीब 15 वर्षों से जालंधर में रह रहे हैं।
विदेश सेवा के दौरान चंदर ने कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बेलारूस स्थित भारतीय दूतावास के अभिलेखों के अनुसार, उन्होंने 16 फरवरी 2009 से 31 दिसंबर 2010 तक बेलारूस में भारत के राजदूत के रूप में सेवाएं दीं। इससे पहले वह जापान में भारत के काउंसलर, ब्रिटेन के एडिनबर्ग में महावाणिज्यदूत और प्राग स्थित भारतीय दूतावास में मंत्री के पद पर भी रह चुके हैं।
2003 की मतदाता सूची को लेकर स्थिति
चंदर के मुताबिक, पंजाब में चल रहे एसआईआर में वर्ष 2003 की मतदाता सूची को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। हालांकि, वर्ष 2003 में वह जापान में भारत की राजनयिक जिम्मेदारियां निभा रहे थे। ऐसे में उस समय जालंधर की स्थानीय मतदाता सूची में उनका नाम नहीं होना उनके अनुसार स्वाभाविक है।
उनका कहना है कि इसी वजह से पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान दस्तावेजों के बीच सत्यापन को लेकर स्थिति पैदा हुई है। चंदर ने बताया कि उन्होंने पूर्व राजदूत नवदीप सूरी से जुड़े ऐसे ही मामले के बारे में पढ़ा था, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उन्हें भी इसी तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
अब चंदर को निर्धारित तिथि पर निर्वाचन कार्यालय में दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा उनके दस्तावेजों और मतदाता सूची में उनकी पात्रता का सत्यापन किया जाएगा।
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