सोनम वांगचुक का चीन को जवाब, बोले- ‘तिब्बत कब खाली करोगे?’; केंद्र से वार्ता के बाद कहा- ‘हमें तो अपनों ने लूटा’
लेह। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख को लेकर चीन की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि चीन को लद्दाख के संबंध में बयान देने का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर लद्दाख के लोगों से किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा, “हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में क्या दम था।”
वांगचुक ने 16 अक्टूबर को जारी एक वीडियो में कहा कि चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता नहीं देने संबंधी बयान दिया था। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि चीन को लद्दाख के मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तिब्बत का जिक्र करते हुए सवाल किया कि चीन तिब्बत कब खाली करेगा और वहां के लोगों को उनका अधिकार कब देगा। लेह एपेक्स बॉडी ने भी चीन की टिप्पणी की निंदा की है। वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोग भारत के साथ थे और आगे भी रहेंगे।
चीन के बयान के बाद वांगचुक ने केंद्र सरकार के साथ लद्दाख के नेताओं की वार्ता पर भी निराशा जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने और संवैधानिक सुरक्षा देने के आश्वासन दिए गए थे, लेकिन हालिया बातचीत में इन मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
वांगचुक के मुताबिक, प्रस्तावित विधानसभा की शक्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर केंद्र तथा लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा देने के मुद्दे पर भी पहले दिए गए आश्वासनों से पीछे हटने का संकेत मिला है। इन मुद्दों पर लद्दाख के प्रतिनिधियों ने असंतोष जताया है।
गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच 15 अक्टूबर को लेह में हुई बैठक बेनतीजा रही। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधियों ने केंद्र के मसौदा प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। हालांकि, दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है और अगली बैठक 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित है।
वांगचुक ने केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि लद्दाख के लोग बाहरी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं, लेकिन जब उन्हें अपनी ही सरकार से निराशा मिलती है तो वे अपनी मांगें लेकर कहां जाएं। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं तथा सरकार को अपने आश्वासनों पर अमल करना चाहिए।
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