अमौसी जोन में स्मार्ट मीटर की जिम्मेदारी पर सवाल, एजेंसी से उपभोक्ता तक मीटर की ‘यात्रा’ का रिकॉर्ड क्यों?
लखनऊ। स्मार्ट मीटर व्यवस्था को पारदर्शिता, रियल टाइम डेटा और बेहतर बिलिंग के लिए महत्वपूर्ण बताया जाता है, लेकिन अमौसी जोन से सामने आए एक मामले में मीटर की स्थापना, रिकॉर्ड और उपभोक्ता के कनेक्शन से उसकी मैपिंग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित स्मार्ट मीटर 11 सितंबर 2025 को इंटेलीस्मार्ट की ओर से अमौसी जोन के तत्कालीन अधिशासी अभियंता (मीटर) विवेक कुमार को उपलब्ध कराया गया था। आरोप है कि करीब चार महीने बाद यह मीटर दुबग्गा क्षेत्र पहुंचा और बाद में बड़ागांव, काकोरी क्षेत्र के एक उपभोक्ता के परिसर में लगाया गया।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्मार्ट मीटर की स्थापना और उससे जुड़ी प्रक्रिया संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी थी, तो मीटर विभागीय अधिकारी के कब्जे में किस प्रक्रिया और किस अभिलेख के आधार पर आया। इसके बाद इसे किस आदेश के तहत दुबग्गा क्षेत्र भेजा गया और किस प्रक्रिया के तहत उपभोक्ता के कनेक्शन से जोड़ा गया, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि यह मीटर करीब नौ महीने से बड़ागांव, काकोरी क्षेत्र के एक उपभोक्ता के परिसर में लगा हुआ है। ऐसे में मीटर की स्थापना तिथि, उपभोक्ता संख्या, कनेक्शन संख्या, मीटर नंबर और विभागीय सिस्टम में उसकी मैपिंग का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि इन सभी जानकारियों का रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है तो मीटर की स्थापना और बिलिंग की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्मार्ट मीटर में सिम और संचार की सुविधा होने के बावजूद केवल सर्वर पर डेटा उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि उस डेटा को संबंधित उपभोक्ता, कनेक्शन और मीटर की वास्तविक स्थापना से प्रमाणित रूप से जोड़ा जा सके। यदि भविष्य में मीटर बदल दिया जाता है तो पुराने मीटर की स्थिति और उससे संबंधित खपत का सत्यापन किस रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा, यह भी जांच का विषय है।
मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मीटर उपभोक्ता के यहां लगाया गया था तो उसका विभागीय रिकॉर्ड क्यों नहीं बना, बिलिंग कब शुरू हुई और इतने लंबे समय तक किसी अधिकारी ने इसकी निगरानी क्यों नहीं की। मीटर किस आदेश पर जारी हुआ, किस आदेश पर लगाया गया और उसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी या एजेंसी की थी, इन बिंदुओं की जांच से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इस मामले के सामने आने के बाद अमौसी जोन में पिछले एक वर्ष के दौरान लगाए गए स्मार्ट मीटरों के रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग भी उठ रही है। इसमें स्टॉक से निकले मीटर से लेकर संबंधित अधिकारी या एजेंसी को सौंपे जाने, उपभोक्ता को आवंटित किए जाने, स्थापना की तारीख, कनेक्शन से मैपिंग, पहला डेटा और पहला बिल बनने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा सकती है। इससे यह पता चल सकेगा कि सामने आया मामला अलग है या ऐसी कोई और विसंगति भी मौजूद है।
इसी क्रम में अमौसी जोन से जुड़े अवर अभियंता हिमांशु को लेकर भी कुछ शिकायतों और प्रकरणों की जांच की मांग सामने आई है। आरोप लगाए गए हैं कि उनकी तैनाती और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल हैं तथा उनके अधीन या संबंधित कर्मचारियों की भूमिका से जुड़े करीब 10 प्रकरणों का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के बिना इन्हें तथ्य नहीं माना जा सकता। यदि शिकायतें सही हैं तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
मामले में मुख्य अभियंता रामकुमार से स्मार्ट मीटर की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की जा रही है। जांच में यह देखा जाना जरूरी है कि मीटर इंटेलीस्मार्ट से किस अधिकारी को मिला, उसका स्टॉक और हैंडओवर रिकॉर्ड क्या है, बड़ागांव-काकोरी के उपभोक्ता के यहां मीटर किस आदेश पर लगाया गया, कनेक्शन से उसकी मैपिंग कब हुई, मीटर की रीडिंग और बिलिंग हिस्ट्री क्या है तथा विभागीय सिस्टम में उसका पूरा विवरण दर्ज है या नहीं।
साथ ही यह भी जांच का विषय है कि यदि संबंधित मीटर की बिलिंग नहीं हुई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी और अमौसी जोन में ऐसे कितने मीटर हैं जिनकी भौतिक स्थापना और विभागीय रिकॉर्ड का अभी तक मिलान नहीं हुआ है। एजेंसी और विभागीय अधिकारियों के बीच मीटर के हैंडओवर और इंस्टॉलेशन की पूरी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।
फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, हैंडओवर दस्तावेज, मीटर की स्थापना संबंधी विवरण और उपभोक्ता की बिलिंग हिस्ट्री की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकती है। सवाल केवल एक स्मार्ट मीटर का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि एजेंसी से लेकर विभाग और विभाग से उपभोक्ता तक मीटर की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड में स्पष्ट और सत्यापन योग्य रहे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)