एसआईआर विवाद: असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर उठाए सवाल, पूछा- फैसले किस बहुमत से लिए गए?
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए या बहुमत के आधार पर। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर फैसले बहुमत से लिए गए थे तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस बहुमत के आधार पर निर्णय हुआ।
ओवैसी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बाद आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों पर कहा है कि आयोग द्वारा लिए गए सभी आधिकारिक फैसले और एसआईआर से जुड़े निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
ओवैसी ने एसआईआर प्रक्रिया में आम मतदाताओं, खासकर दस्तावेज जुटाने में कठिनाई का सामना करने वाले लोगों से जुड़े सवाल भी उठाए। उन्होंने यह सवाल भी किया कि जिन परिवारों के माता-पिता या दादा-दादी के नाम पुराने मतदाता रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं, वे अपने पारिवारिक संबंध और पात्रता कैसे साबित करेंगे।
चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को सत्यापित और अद्यतन करना है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आंतरिक स्तर पर अधिकारियों द्वारा दिए गए लिखित सुझाव, टिप्पणियां और तकनीकी आपत्तियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं और अंतिम आधिकारिक आदेश आयोग की स्थापित प्रक्रिया के अनुसार जारी किए जाते हैं।
इस बीच 26 सितंबर की आयोग की बैठक में एसआईआर नोटिस पाने वाले उन मतदाताओं के लिए प्रक्रिया में बदलाव किया गया, जिनके रिकॉर्ड में ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ जैसी स्थिति सामने आई है। आयोग के अनुसार ऐसे लोगों को सामान्य तौर पर निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने के बजाय बूथ लेवल अधिकारी उनके घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे। जरूरत पड़ने पर ही सुनवाई कराई जाएगी।
एसआईआर को लेकर अब मुख्य विवाद चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, मतदाताओं से मांगे जा रहे दस्तावेज और मतदाता सूची में नामों के सत्यापन के तरीके को लेकर है। आयोग की ओर से सर्वसम्मति से निर्णय लेने की बात कही गई है, जबकि ओवैसी समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने प्रक्रिया और निर्णय लेने के तरीके को लेकर सवाल उठाए हैं।
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