एसआईआर विवाद: शुभेंदु अधिकारी का ममता बनर्जी पर निशाना, श्रीरामपुर की सभा में 150 लोगों के आने का किया दावा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि विपक्ष को जनता का समर्थन नहीं मिल रहा है। उन्होंने हाल ही में श्रीरामपुर में हुई ममता बनर्जी की एक सभा का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां करीब 150 लोग ही मौजूद थ
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी 15 साल तक मुख्यमंत्री रहीं और छह बार सांसद भी रही हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों में राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आया है। उन्होंने श्रीरामपुर में हुई सभा में मौजूद लोगों की संख्या का हवाला देते हुए अपने दावे के समर्थन में इसे विपक्ष की स्थिति से जोड़कर पेश किया।
एसआईआर के दौरान तार्किक विसंगतियों के आधार पर मतदाता सूची से हटाई गई प्रविष्टियों को लेकर भी शुभेंदु अधिकारी ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि करीब 60 लाख मामलों में से 27 लाख प्रविष्टियां तार्किक विसंगतियों के आधार पर हटाई गईं और इस प्रक्रिया में चुनाव पंजीकरण अधिकारियों ने भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने कई बार सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी और माकपा नेता एमए बेबी को भी केरल में एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन करने की चुनौती दी। उन्होंने पश्चिम बंगाल और केरल में एसआईआर से जुड़ी परिस्थितियों को अलग बताते हुए अपनी राजनीतिक बात रखी।
वहीं, एसआईआर को लेकर ममता बनर्जी पहले चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। उनका आरोप है कि प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है और इससे भाजपा को लाभ पहुंच सकता है। चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच मतदाता सूची के सत्यापन और नामों को लेकर यह विवाद लगातार राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान हटाई गई प्रविष्टियों और उन पर दाखिल अपीलों को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि हटाए गए नामों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की मांग को लेकर 22.21 लाख अपीलें दाखिल की गई थीं। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और उससे जुड़े दावों पर आगे भी राजनीतिक और कानूनी बहस जारी रहने की संभावना है।
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