RAF ने छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग की बात मानी, अधिकारियों-कार्मिकों को चेतावनी; भीड़ नियंत्रण के तरीकों पर जारी हुए नए निर्देश
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग को लेकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की विशेष इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने अपने अधिकारियों और जवानों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आरएएफ के महानिरीक्षक (IG) ने माना कि प्रदर्शन के दौरान कुछ मामलों में अनावश्यक बल प्रयोग के आरोप सामने आए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अधिकारियों एवं कार्मिकों को सख्त चेतावनी दी गई है।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि आरएएफ का मूल सिद्धांत "संवेदनशील पुलिसिंग" है और हर परिस्थिति में बल का प्रयोग केवल आवश्यक सीमा तक, न्यायोचित, निष्पक्ष, संयमित और संवेदनशील तरीके से किया जाना चाहिए। निर्देशों में सोशल मीडिया पर वायरल उन वीडियो का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें कुछ जवानों पर भीड़ से अलग खड़े छात्रों के साथ अनावश्यक बल प्रयोग करने के आरोप लगाए गए हैं।
आरएएफ के अनुसार, कुछ वीडियो में व्यक्तियों को जानबूझकर गिराने, बैरिकेड से बाहर जा रहे लोगों पर प्रहार करने जैसी घटनाएं दिखाई दे रही हैं, जो बल की स्थापित कार्य संस्कृति और छवि के अनुरूप नहीं हैं। आईजी ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया जा सकता और सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।
निर्देशों में कहा गया है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए अपनाए गए कुछ तरीके निर्धारित मानकों और प्रशिक्षण के अनुरूप नहीं थे। अधिकारियों और जवानों को भीड़ की प्रकृति तथा परिस्थितियों का आकलन कर ही बल प्रयोग का निर्णय लेने के लिए कहा गया है। साथ ही, बल प्रयोग से पहले चेतावनी देने और आवश्यकता पड़ने पर ही लाठीचार्ज, आंसू गैस तथा अन्य स्वीकृत भीड़ नियंत्रण उपाय अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
आरएएफ ने अपने सभी अधिकारियों और जवानों को मीडिया से दूरी बनाए रखने के भी निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि कोई भी अधिकारी या कार्मिक मीडिया को बयान नहीं देगा, व्हाट्सएप समूहों में इस मामले से जुड़ी चर्चा नहीं करेगा और सोशल मीडिया पर कोई जानकारी साझा नहीं करेगा। इन निर्देशों का उल्लंघन अनुशासनहीनता माना जाएगा।
इस बीच, प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर भी विवाद जारी है। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने सुरक्षा बलों पर आरोप लगाए हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है। इस मामले पर सीआरपीएफ की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो की प्रामाणिकता और घटनाक्रम की भी अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है।
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