मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा: 590 दिन बाद सौरभ हत्याकांड में फैसला, 126 सुनवाई और 22 गवाहों की अहम भूमिका
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मर्चेंट नेवी से जुड़े सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में करीब 590 दिन बाद सजा का ऐलान हुआ। मुकदमे के दौरान 126 सुनवाई हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। पुलिस ने घटना के करीब 54 दिन बाद आरोपपत्र दाखिल किया था।
सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ स्थित अपने घर लौटे थे। कुछ दिनों बाद, मार्च की शुरुआत में उनकी हत्या कर दी गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद सौरभ के शव को छिपाने के लिए नीले प्लास्टिक के ड्रम का इस्तेमाल किया गया। ड्रम में शव के अवशेष रखकर सीमेंट और रेत से बंद कर दिया गया था।
17 मार्च 2025 को मामले का खुलासा हुआ, जब घर में रखे ड्रम से दुर्गंध आने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने जांच के दौरान सौरभ के अवशेष बरामद किए। इसके बाद सौरभ के परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने 18 मार्च 2025 को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया।
जांच के दौरान पुलिस ने करीब एक हजार पन्नों का आरोपपत्र तैयार किया, जिसमें फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान शामिल किए गए। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 गवाह पेश किए। इनमें सौरभ के परिजनों के अलावा मामले से जुड़े सामान की खरीद और आरोपियों की आवाजाही से संबंधित जानकारी देने वाले लोग भी शामिल थे। मामले में प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने के कारण अभियोजन ने परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया और सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की। बुधवार को अंतिम सुनवाई के बाद दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। अदालत ने हत्या और साक्ष्य नष्ट करने से जुड़े अपराधों के लिए जुर्माना भी लगाया।
फैसले के बाद सौरभ के परिवार ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताया। वहीं, कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषियों के पास फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प रहेगा। मृत्युदंड के मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और आवश्यक पुष्टि भी कानूनी व्यवस्था के अनुसार होगी।
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने मार्च 2025 में देशभर में ध्यान खींचा था। अब अदालत के फैसले के बाद मामले में एक अहम चरण पूरा हुआ है, जबकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
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