540 सफाई कर्मचारियों की भर्ती छह माह से लंबित, 1 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी
गोपाल चतुर्वेदी
मथुरा। मथुरा-वृंदावन नगर निगम में 540 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला अब भी लंबित है। दीपावली और यम द्वितीया जैसे प्रमुख त्योहार नजदीक आने के बीच कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 27 अक्टूबर तक भर्ती प्रक्रिया को लेकर ठोस पहल नहीं हुई, तो वे 1 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। ऐसे में नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने त्योहारों से पहले सफाई व्यवस्था को लेकर समाधान निकालने की चुनौती है।
जानकारी के अनुसार, 540 सफाई कर्मचारियों से जुड़ा प्रस्ताव अप्रैल में बोर्ड बैठक में रखे जाने और पारित होने की बात कही जा रही है। हालांकि, नगर निगम प्रशासन ने 7 अक्टूबर को हुई वार्ता में स्पष्ट किया था कि जून में शुरू की गई सफाई श्रमिकों की आपूर्ति प्रक्रिया को सदन की स्वीकृति नहीं मिल सकी। मानदेय का भुगतान नगर निगम निधि से प्रस्तावित होने के कारण बोर्ड की मंजूरी आवश्यक बताई गई। इस अंतर के चलते प्रस्ताव की वास्तविक स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई को स्पष्ट करना जरूरी हो गया है।
इससे पहले नियुक्ति की मांग को लेकर सफाई कर्मचारियों ने आंदोलन किया था। नगर आयुक्त ओजस्वी राज की मौजूदगी में 7 अक्टूबर को हुई वार्ता के बाद हड़ताल स्थगित कर दी गई थी। उस समय आश्वासन दिया गया था कि भर्ती से संबंधित प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में प्राथमिकता के आधार पर रखा जाएगा और बैठक की तारीख तय कराने के लिए महापौर को पत्रावली भेजी जाएगी। अब कर्मचारियों की ओर से नई समयसीमा दिए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आश्वासन पर आगे कितनी प्रगति हुई है।
कर्मचारियों का आरोप है कि नियुक्ति की उम्मीद में उनसे करीब 15 दिन तक विभिन्न वार्डों में सफाई कार्य कराया गया, लेकिन बाद में उन्हें काम से रोक दिया गया। कर्मचारियों ने काम और मानदेय से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं। इन दावों की नियमानुसार जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि श्रमिकों को उनके काम और भुगतान के संबंध में उचित जवाब मिल सके।
इस मामले में महापौर विनोद अग्रवाल और नगर निगम प्रशासन से प्रस्ताव की स्थिति, बोर्ड बैठक की संभावित तारीख तथा भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की समयसीमा स्पष्ट करने की अपेक्षा है। वहीं, हड़ताल स्थगित कराने के लिए हुई वार्ता में शामिल पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए मनाना तभी सार्थक होगा, जब उनकी मूल मांग पर निर्णय की दिशा में भी ठोस प्रगति दिखाई दे।
नगर निगम में बोर्ड बैठक नहीं होने से अन्य विकास और वित्तीय प्रस्तावों के लंबित रहने की बात भी सामने आई है। कुछ पार्षद बैठक बुलाने के लिए शासन से अनुमति लेने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। यदि यह रास्ता अपनाया जाता है, तो उसकी प्रक्रिया और संभावित समयसीमा को सार्वजनिक करना जरूरी होगा।
अब 27 अक्टूबर तक का समय निर्णायक माना जा रहा है। यदि 1 नवंबर से हड़ताल शुरू होती है, तो त्योहारों के दौरान मथुरा-वृंदावन की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। दोनों शहरों में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है, ऐसे में समय रहते समाधान निकालना नगर निगम की प्राथमिकता होनी चाहिए।
फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि 540 सफाई कर्मचारियों से जुड़ा प्रस्ताव किस स्तर पर लंबित है, बोर्ड बैठक कब बुलाई जाएगी और कर्मचारियों के काम तथा भुगतान से जुड़े दावों पर क्या कार्रवाई होगी। त्योहारों से पहले स्पष्ट निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई ही संभावित हड़ताल तथा सफाई संकट से बचने का रास्ता बन सकती है।
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