परिसीमन पर पीएम मोदी को खरगे की चेतावनी, बोले— संसद में विधेयक थोपने की कोशिश न करें
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परिसीमन के प्रस्तावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों से चर्चा किए बिना व्यापक प्रभाव वाले संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पारित कराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
खरगे ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। उन्होंने इस स्थिति को असामान्य बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था। खरगे के अनुसार, सरकार को नए प्रस्तावों पर आगे बढ़ने से पहले सभी दलों को चर्चा का पर्याप्त अवसर देना चाहिए, ताकि वे विधेयक के प्रावधानों और उनके संभावित प्रभावों का अध्ययन कर सकें।
खरगे ने कहा कि वह इससे पहले भी कई बार प्रधानमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री से परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध कर चुके हैं। उन्होंने जोर दिया कि यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है, इसलिए राजनीतिक दलों के साथ-साथ राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों की चिंताओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
परिसीमन के मुद्दे पर विपक्ष की प्रमुख चिंता लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर है। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों का कहना है कि किसी भी नए प्रस्ताव पर व्यापक सहमति और पारदर्शी चर्चा जरूरी है। वहीं, सरकार की ओर से नए प्रस्तावों को लेकर आगे की औपचारिक प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
खरगे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि किसी भी नए विधेयक को संसद में लाने से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाए और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय दिया जाए।
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