SIR के बाद SSR पर भी विवाद, DMK ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना; नाम हटाए जाने पर दी आंदोलन की चेतावनी
चेन्नई। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अब विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) को लेकर भी राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने चुनाव आयोग के नए कदम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद विपक्षी दलों की नाराजगी कम करने के लिए SSR की प्रक्रिया शुरू की गई है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि नई प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर वह विरोध करेगी।
DMK के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान कई मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनके मुताबिक, SSR के जरिए विपक्ष को शांत करने और विवाद को कम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी मतदाता सूची में होने वाले बदलावों पर नजर रखेगी और अनियमितताएं सामने आने पर उनके खिलाफ आवाज उठाएगी। हालांकि, नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़े आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है।
चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR कराने का कार्यक्रम घोषित किया है। इसमें तमिलनाडु के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, केरल और अन्य राज्य शामिल हैं। इस प्रक्रिया के लिए एक जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख तय की गई है। आयोग के अनुसार, इसका उद्देश्य पात्र नए मतदाताओं को सूची में शामिल करना, विवरण में गलतियां सुधारना और मतदाता सूची को अद्यतन करना है।
निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, मसौदा मतदाता सूची 12 नवंबर 2026 को जारी होगी। इसके बाद मतदाता नाम जोड़ने, हटाने या विवरण में सुधार के लिए 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची चार जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी।
SIR और SSR में मुख्य अंतर प्रक्रिया के दायरे का है। SIR के तहत मतदाता सूची का विशेष गहन सत्यापन किया जाता है, जबकि SSR मौजूदा सूची को अद्यतन करने की नियमित प्रक्रिया है। हालांकि, SSR के दौरान भी नियमानुसार नाम जोड़े या हटाए जा सकते हैं और विवरण में सुधार किया जा सकता है। इसलिए मतदाताओं के लिए मसौदा सूची में अपना नाम और अन्य जानकारियां जांचना महत्वपूर्ण होगा।
यदि किसी पात्र मतदाता का नाम मसौदा सूची में नहीं मिलता है या उसके विवरण में गलती होती है, तो वह निर्धारित अवधि में संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष दावा या आपत्ति दर्ज करा सकता है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों की जांच की जाती है। नाम हटाने से जुड़े मामलों में भी निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है।
SIR को लेकर विपक्ष पहले से ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में SSR की प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता, दावों-आपत्तियों का निष्पक्ष निपटारा और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।
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