जम्मू-कश्मीर: उमर अब्दुल्ला की लद्दाख नेतृत्व को सलाह, केंद्र से मौखिक नहीं लिखित आश्वासन लेने को कहा
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख और कारगिल के नेताओं से केंद्र सरकार के मौखिक आश्वासनों पर निर्भर नहीं रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि भूमि और रोजगार समेत संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लिखित और आधिकारिक आश्वासन मिलने के बाद ही भरोसा करना चाहिए
पुलवामा में पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लद्दाख के मुद्दे जम्मू-कश्मीर से अलग हैं, लेकिन एक मित्र और शुभचिंतक के तौर पर वह लद्दाख व कारगिल के नेताओं से यही कहेंगे कि केंद्र से लिखित और हस्ताक्षरित दस्तावेज लेने का प्रयास करें।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन करीब दो साल बाद भी यह पूरा नहीं हुआ है। इसी संदर्भ में उन्होंने लद्दाख नेतृत्व को संभव हो तो औपचारिक दस्तावेज या हलफनामे के रूप में आश्वासन लेने की सलाह दी।
दरअसल, लद्दाख के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों को लेकर केंद्र और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है। हाल की वार्ताओं में भूमि, रोजगार, संस्कृति और स्थानीय शासन से जुड़े सुरक्षा उपायों पर चर्चा हुई है। केंद्र की ओर से संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव भी सामने आया है, लेकिन प्रस्ताव का विस्तृत मसौदा अभी बातचीत का विषय बना हुआ है।
वहीं, उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को पुलवामा में विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की। इस दौरान जिले में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति और बजट के इस्तेमाल का जायजा लिया गया।
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