भारत को सिर्फ बाजार नहीं मानतीं जर्मन कंपनियां, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग में साझेदारी पर जोर
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जर्मन कंपनियां अब भारत को केवल सामान बेचने के बाजार के रूप में नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और नवाचार के प्रमुख साझेदार के रूप में देख रही हैं। जर्मनी के बर्लिन में अपने दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की प्रतिभा, कौशल तथा उत्पादन क्षमता मिलकर दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।
गोयल ने 23 अक्टूबर को जर्मन उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शोध संस्थानों के साथ हुई बैठकों में व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने सीमेंस हेल्थिनियर्स, बर्टेल्समैन इन्वेस्टमेंट्स, वोक्सवैगन और स्कोडा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बातचीत की। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच कारोबारी साझेदारी और औद्योगिक निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाना था।
मंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच सहयोग को केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहिए। दोनों देशों के उद्योगों, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को मिलकर नई तकनीक विकसित करने, अनुसंधान को व्यावहारिक उत्पादों में बदलने और भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहिए। पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, बैटरी तकनीक और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र इस साझेदारी के लिए अहम माने जा रहे हैं।
गोयल ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को देश लौटने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। बर्लिन में भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग जगत, विश्वविद्यालयों और प्रमुख शोध संस्थानों के साथ मिलकर ऐसा माहौल तैयार करने की दिशा में काम करना चाहती है, जहां प्रतिभाशाली लोगों को भारत में बेहतर अवसर मिल सकें।
उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को वापस लाने के लिए केवल अच्छा वेतन पर्याप्त नहीं है। आधुनिक प्रयोगशालाएं, शोध के लिए जरूरी संसाधन, संस्थागत सहयोग और उद्योगों के साथ काम करने के अवसर भी महत्वपूर्ण हैं। जर्मनी के शोध संस्थानों के अनुभव से भारत को अनुसंधान और औद्योगिक उत्पादन के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने में मदद मिल सकती है।
भारत-जर्मनी सहयोग को व्यापक आर्थिक साझेदारी से जोड़ते हुए गोयल ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस तरह की साझेदारी से निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान, नए कारोबारी अवसर और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ दोनों देशों के उद्योगों और शोध संस्थानों के बीच ठोस परियोजनाओं तथा निवेश में बदलने पर निर्भर करेगा।
गोयल 22 से 24 अक्टूबर तक जर्मनी और इसके बाद 24 से 27 अक्टूबर तक नीदरलैंड के दौरे पर हैं। उनके साथ लगभग 100 भारतीय कारोबारियों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों का दल भी गया है। इस दौरे का उद्देश्य भारत के यूरोपीय साझेदारों के साथ व्यापार, निवेश, उन्नत विनिर्माण और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)