जारांगे के वायरल ऑडियो पर भाजपा का संजय राउत पर आरोप, राहुल गांधी का नाम भी घसीटा
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे-पाटिल के वायरल ऑडियो को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। कथित रिकॉर्डिंग में 500 करोड़ रुपये के लेन-देन का दावा सामने आने के बाद अब भाजपा ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा का दावा है कि ऑडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार किया गया और इसके जरिए पार्टी तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच विवाद पैदा करने की कोशिश की गई। भाजपा ने इस कथित अभियान के पीछे कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हाथ होने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने 24 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि संजय राउत ने नवी मुंबई के वाशी स्थित कथित वॉर रूम से इस पूरे अभियान को संचालित किया। उन्होंने दावा किया कि ऑडियो क्लिप में अलग-अलग आवाजों को एआई की मदद से जोड़ा गया और इसे राजनीतिक नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया। भाजपा ने मामले की जांच कराने और साक्ष्य मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है।
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस कथित अभियान का उद्देश्य भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और मनोज जरांगे के बीच टकराव बढ़ाना था, जिससे कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) को राजनीतिक लाभ मिल सके। उन्होंने इस मामले में राहुल गांधी से कथित संबंधों और संभावित वित्तीय लेन-देन की भी जांच की मांग की। ये सभी आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं और अभी प्रमाणित नहीं हुए हैं।
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब मनोज जरांगे ने 22 अक्टूबर को जालना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित ऑडियो क्लिप सार्वजनिक की। रिकॉर्डिंग में दावा किया गया कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले मराठा आरक्षण आंदोलन को प्रभावित करने के लिए जरांगे तक 500 करोड़ रुपये पहुंचाए गए थे। क्लिप में यह रकम एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से दिए जाने की बात कही गई। जरांगे ने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रची गई थी।
एकनाथ शिंदे ने कथित लेन-देन के आरोपों को खारिज किया है और जरांगे से अपने दावों के समर्थन में सबूत पेश करने को कहा है। दूसरी ओर, शिवसेना के कुछ नेताओं ने भी ऑडियो की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस विवाद के बीच भाजपा और शिवसेना के नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी तेज हो गई है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 23 अक्टूबर को कथित ऑडियो की फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए थे। जांच में रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता, उसमें मौजूद आवाजों की पहचान और किसी संभावित तकनीकी छेड़छाड़ की पड़ताल की जाएगी। फडणवीस ने ऑडियो सामने आने के समय और इसके पीछे के उद्देश्य को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल ऑडियो वास्तविक बातचीत की रिकॉर्डिंग है या इसमें किसी तरह का बदलाव किया गया है। न ही 500 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन की पुष्टि हुई है। अब मामले में फॉरेंसिक जांच के निष्कर्ष अहम होंगे, जिनसे रिकॉर्डिंग की सत्यता और इसके प्रसार से जुड़े दावों की पड़ताल हो सकेगी।
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