ईरान पर नए हमले की आशंका, ट्रंप के बयान से बढ़ी अटकलें; मध्यावधि चुनाव के बाद क्या होगा?
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने क्षेत्र में तनाव को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। ईरान के साथ बातचीत और संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी प्रशासन के रुख में अनिश्चितता बनी हुई है। इसी बीच, मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका और इस्राइल ईरान पर नए हमलों के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, किसी नए हमले की तारीख या अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रॉयटर्स की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। उन्होंने उस समय ईरान के साथ जारी बातचीत को सकारात्मक बताया था। यह बयान ऐसे समय आया, जब दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल करने को लेकर प्रस्तावों का आदान-प्रदान हो रहा था।
हालांकि, 20 अक्टूबर को प्रकाशित रॉयटर्स की एक अन्य रिपोर्ट में ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि तेहरान को अमेरिका और इस्राइल की ओर से दोबारा हमले की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के अधिकारियों का मानना है कि बातचीत में गतिरोध बना रहने से सैन्य टकराव का खतरा खत्म नहीं हुआ है। ये आकलन अधिकारियों के बयानों पर आधारित हैं, किसी घोषित सैन्य फैसले की पुष्टि नहीं।
अमेरिका और इस्राइल के बीच ईरान को लेकर रणनीतिक समन्वय जारी है। मीडिया रिपोर्टों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सैन्य ढांचे से जुड़े संभावित लक्ष्यों पर नए विकल्प तैयार किए जाने की बात कही गई है। दूसरी ओर, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताते हुए संवर्धन गतिविधियां रोकने और अपने यूरेनियम भंडार को सौंपने की मांगों का विरोध किया है।
इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से तेल की आपूर्ति, कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की संभावना इस मार्ग को फिर से सामान्य बनाने से भी जुड़ी हुई है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि मध्यावधि चुनाव के बाद अमेरिका अपनी नीति में क्या बदलाव करता है। ट्रंप के पहले के बयान के अनुसार, चुनाव से पहले हमला नहीं किया जाएगा, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसके बाद सैन्य कार्रवाई निश्चित है। नए हमले की संभावना को लेकर चल रही चर्चाओं और आधिकारिक निर्णय के बीच अंतर करना जरूरी है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास, दोनों देशों की शर्तें और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति आगे की दिशा तय करेंगे।
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